Shri Janki Katha Sitamarhi:सीतामढ़ी जिला अंतर्गत डुमरा प्रखंड के कुम्हरा विष्णुपुर स्थित श्रीराम-जानकी मठ में रामायण रिसर्च काउंसिल के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ‘श्रीजानकी कथा’ का रविवार को भक्तिभाव के साथ समापन हो गया. समापन के विशेष अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं, युवतियों और बालिकाओं ने कथा श्रवण किया और मां जानकी के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया.
माता सीता धैर्य, साहस, करुणा और आत्मसम्मान की प्रतीक: बाल व्यास वेदांतजी
कथा व्यास, 12 वर्षीय बाल व्यास वैदेहीनंदन वेदांतजी महाराज ने मां जानकी के पावन जीवन-दर्शन का भावपूर्ण वर्णन किया. उन्होंने कहा कि माता सीता धैर्य, साहस, करुणा, मर्यादा और आत्मसम्मान की जीवंत प्रतीक हैं. वेदांतजी महाराज ने जोर देकर कहा कि यदि समाज को वास्तव में सशक्त बनाना है, तो बेटियों को शिक्षित, संस्कारित और आत्मनिर्भर बनाना सबसे पहली आवश्यकता है.उन्होंने आगे कहा कि श्रीजानकी कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह नारी सम्मान, पारिवारिक संस्कार और मातृशक्ति जागरण का एक राष्ट्रव्यापी अभियान है. परिवारों में मां जानकी के उच्च जीवन-मूल्यों को पहुंचाने से ही समाज में सकारात्मक और स्थाई परिवर्तन आएगा.
पूरे देश में विस्तार लेगा 'श्रीजानकी कथा' अभियान
रामायण रिसर्च काउंसिल के सीतामढ़ी जिला संगठन प्रभारी नीरज गोयनका ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सीतामढ़ी मां जानकी की पाकट्यभूमि (जन्मभूमि) है. इसलिए यहीं से श्रीजानकी कथा अभियान को पूरे बिहार समेत देशभर में विस्तार देने का एक बड़ा संकल्प लिया गया है. वहीं, शोध समिति के अध्यक्ष रामशरण अग्रवाल ने सीतामढ़ी को एक विशेष 'शक्ति क्षेत्र' के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे कार्य करने की बात कही.
108 पौधों का रोपण कर दिया गया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कथा के समापन के गरिमामयी अवसर पर एसडीओ आनंद कुमार, एएसपी आशीष आनंद सहित जिले के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे. इस धार्मिक और सामाजिक आयोजन के दौरान परिसर में 108 पौधों का पौधरोपण भी किया गया, जिसके माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण का एक बड़ा संदेश दिया गया. अंत में आयोजकों और श्रद्धालुओं ने मिलकर एक हरित, स्वच्छ एवं संस्कारित समाज के निर्माण का साझा संकल्प लिया.
