बिहार की जेलों में लगेगा T-HCBS सिस्टम, पूरा कारागार परिसर बनेगा 'नो नेटवर्क जोन

बिहार की जेलों में मोबाइल के अवैध इस्तेमाल को रोकने के लिए टी-एचसीबीएस तकनीक लगाई जाएगी। इससे जेल के अंदर नेटवर्क पूरी तरह ब्लॉक रहेगा और अपराध पर लगाम लगेगी।

Jail Network Blocking System: सीतामढ़ी मंडल कारा सहित बिहार की सभी जेलों के अंदर से मोबाइल फोन के दुरुपयोग और अवैध कॉल पर अब पूरी तरह रोक लगने वाली है. इसके लिए जेलों में 'टावर ऑफ हारमोनिएस कॉल ब्लॉकिंग सिस्टम' (T-HCBS) तकनीक लगाई जाएगी. इसके एक्टिव होते ही पूरा जेल परिसर 'नो नेटवर्क जोन' में तब्दील हो जाएगा, जबकि बाहर रहने वाले आम लोगों के मोबाइल नेटवर्क पर इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा.

यह भी पढ़ें... व्यवसायी से 50 लाख की बड़ी साइबर ठगी, आधे दाम पर सोलर प्लेट दिलाने का दिया था झांसा

जेल महानिरीक्षक ने टेलीकॉम कंपनियों के साथ की बैठक

इस नई तकनीक को राज्य की सभी जेलों में लागू करने के लिए महानिरीक्षक (कारा एवं सुधार सेवाएं) रजनीश कुमार सिंह ने दूरसंचार विभाग और मोबाइल कंपनियों के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की है. जेल आइजी ने बताया कि गृह मंत्रालय के निर्देश पर दूरसंचार विभाग के माध्यम से राज्य की सभी काराओं में टी-एचसीबीए (T-HCBA) प्रणाली लागू की जानी है. इसके लिए सभी टेलीकॉम कंपनियों और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदाताओं को आपसी समन्वय के साथ जल्द से जल्द एकरारनामा (Agreement) पूरा कर काम शुरू करने का निर्देश दिया गया है.

यह भी पढ़ें... बालिका गृह कांड: पीड़िताओं को न्याय मिला या नहीं? CBI ने मुजफ्फरपुर डीएम से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

जेलों में क्यों पड़ी इस अत्याधुनिक तकनीक की जरूरत?

वर्तमान में जेल के अंदर से बंद कैदियों और अपराधियों द्वारा रंगदारी मांगने, फिरौती के लिए फोन करने, गवाहों को डराने-धमकाने और बाहर अपना अवैध धंधा संचालित करने की शिकायतें लगातार मिलती रही हैं. इससे पहले जेलों में नेटवर्क रोकने के लिए जो जैमर इस्तेमाल किए जाते थे, उनसे आसपास के रिहायशी इलाकों का मोबाइल नेटवर्क भी ठप हो जाता था. इस समस्या को दूर करने के लिए केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा टी-एचसीबीएस सिस्टम तैयार किया गया है. इस सिस्टम के लागू होने से सिर्फ अधिकृत सरकारी फोन ही काम करेंगे और बाकी सभी अवैध मोबाइल ब्लॉक हो जाएंगे.

कैसे काम करता है T-HCBS सिस्टम?

  • टावर बेस्ड ब्लॉकिंग: इस तकनीक के तहत जेल परिसर के अंदर और उसके आसपास विशेष प्रकार के टावर और एंटेना लगाए जाते हैं.
  • सिर्फ जेल के भीतर नेटवर्क ब्लॉक: ये टावर जेल की सीमा के अंदर काम कर रहे सभी प्रमुख नेटवर्क (जैसे- Jio, Airtel, Vi और BSNL) के सिग्नलों को पूरी तरह ब्लॉक कर देते हैं.
  • बाहर नेटवर्क रहेगा सामान्य: जेल की दीवारों के बाहर (100 से 200 मीटर के दायरे में) रहने वाले आम लोगों के मोबाइल सिग्नलों पर इस ब्लॉकिंग सिस्टम का कोई असर नहीं पड़ेगा.


प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

राकेश पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वे प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों का व्यापक अनुभव रखते हैं. राकेश क्राइम रिपोर्टिंग के अलावा सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने के लिए जाने जाते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति और दिलचस्प किस्से-कहानियों में उनकी विशेष रुचि है.

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >