Sitamarhi News: सीतामढ़ी जिले के युवा रंगकर्मी, शोधकर्ता एवं 'भूमिजा द आर्ट्स एंड कल्चर फाउंडेशन' के संस्थापक डॉ. नीतीश प्रियदर्शी ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर संगीत एवं नाट्य विभाग से नाट्यशास्त्र (ड्रामेटिक्स) में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है. सीतामढ़ी जिले में नाट्यशास्त्र विषय से पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाले वे पहले रंगकर्मी बन गए हैं. उनके शोध का विषय "प्राचीन भारतीय रंगशाला का स्थापत्य एवं शिल्प : एक अध्ययन" रहा, जिसे प्रो. (डॉ.) लावण्य कीर्ति सिंह 'काव्य' के निर्देशन में पूरा किया गया है.
वर्धा से एमपीए और यूजीसी-नेट उत्तीर्ण हैं डॉ. प्रियदर्शी
सिरसिया बाजार निवासी डॉ. प्रियदर्शी, जगतारण देवी एवं सुरेंद्र साह के पुत्र हैं. उन्होंने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से फिल्म एवं थिएटर में प्रथम श्रेणी से एमपीए (MPA) किया है. वे परफॉर्मिंग आर्ट्स (थिएटर) से यूजीसी-नेट उत्तीर्ण हैं और बिहार आर्ट थिएटर, पटना से डिप्लोमा इन ड्रामेटिक्स भी प्राप्त कर चुके हैं. इसके अतिरिक्त उन्हें संस्कृति मंत्रालय द्वारा 'सीसीआरटी यंगर आर्टिस्ट स्कॉलरशिप' से भी सम्मानित किया जा चुका है.
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मिथिला की रंगपरंपरा को वैश्विक मंच पर पहुंचाना ही मुख्य लक्ष्य
पिछले एक दशक से रंगमंच, लोकनाट्य और अभिनय व निर्देशन के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. प्रियदर्शी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया. उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य भारतीय नाट्यशास्त्र, लोकनाट्य और मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के संरक्षण और वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए काम करना है. उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर क्षेत्र के शिक्षाविदों, रंगकर्मियों और समाजसेवियों ने उन्हें बधाई व शुभकामनाएं दी हैं.
