Sitamarhi News: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सहयोग पोर्टल पर प्राप्त गंभीर आवेदनों की समीक्षा की. इस दौरान पुपरी अंचल में दाखिल-खारिज से जुड़े एक मामले में गंभीर अनियमितता सामने आने पर तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) और संबंधित राजस्व कर्मचारी के विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया गया.
डीपीआरओ कमल सिंह ने बताया कि यह जानकारी जिलाधिकारी रिची पांडेय के हवाले से दी गई है.
क्या है पूरा मामला?
पुपरी अंचल के हरिहरपुर गांव निवासी मुकेश कुमार ने सहयोग पोर्टल पर गलत जमाबंदी और दाखिल-खारिज को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी. यह मामला मुख्यमंत्री के जनता दरबार तक भी पहुंचा था.
जांच में सामने आई बड़ी गड़बड़ी
जांच में पाया गया कि दाखिल-खारिज वाद संख्या 839/2011 के तहत मौजा तेम्हुआ, थाना संख्या-72, खेसरा संख्या-1369 की कुल 21 डिसमिल भूमि में से मूल रैयत मो. इस्लाम साफी ने 4 डिसमिल भूमि सागर मुखिया के पक्ष में निबंधित विक्रय विलेख संख्या 2173 (दिनांक 16 मई 2011) के माध्यम से बेची थी.
लेकिन दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में केवल 4 डिसमिल के बजाय पूरी 21 डिसमिल भूमि का नामांतरण कर दिया गया. इसके कारण मूल जमाबंदी में शेष भूमि का रकबा शून्य दर्ज हो गया.
शिकायत के बाद खुला मामला
बाद में परिवादी मुकेश कुमार ने भूमि खरीदकर दाखिल-खारिज के लिए आवेदन दिया. जांच के दौरान पुरानी त्रुटि का खुलासा हुआ. जांच प्रतिवेदन में तत्कालीन सीओ और संबंधित राजस्व कर्मचारी की भूमिका प्रथम दृष्टया दोषपूर्ण पाई गई.
पुराने दाखिल-खारिज निरस्त करने का निर्देश
राज्यस्तरीय समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए दोषी अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. साथ ही इस मामले में पूर्व में किए गए सभी दाखिल-खारिज को निरस्त (खंडित) करने के भी निर्देश दिए गए.
