लोकपर्व मधुश्रावणी शुरू, 13 दिनों तक पति की दीर्घायु के लिए नवविवाहिताएं करेंगी व्रत

मिथिलांचल में मधुश्रावणी महापर्व की शुरुआत हो गई है। नवविवाहिताएं पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए 13 दिनों तक कठिन नियमों के साथ व्रत रखेंगी।

Madhushravani Festival Mithila: मिथिलांचल की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपरा का प्रतीक मधुश्रावणी महापर्व सोमवार से श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो गया. नवविवाहित महिलाओं का यह विशेष पर्व मिथिला की सांस्कृतिक पहचान माना जाता है. इस दौरान नवविवाहिताएं मायके में रहकर पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की मंगलकामना के लिए 13 दिनों तक कठोर व्रत एवं विशेष अनुष्ठान करेंगी.

महिला पुरोहितों की रहती है अहम भूमिका

मधुश्रावणी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पूजा-अर्चना और कथावाचन का दायित्व महिला पुरोहित या गांव की अनुभवी बुजुर्ग महिलाओं के हाथों होता है. वे व्रतियों को गौरी-शंकर, शिव-विवाह, मंगला गौरी, पृथ्वी जन्म, बिहुला और गंगा कथा समेत 14 पारंपरिक कथाएं सुनाती हैं. इन कथाओं के माध्यम से प्रेम, विश्वास, त्याग और पारिवारिक मूल्यों का संदेश दिया जाता है.

व्रत के कठोर नियम और धार्मिक मान्यताएं

  • भोजन व शयन: व्रत के दौरान नवविवाहिताएं नमक का सेवन नहीं करती हैं, जमीन पर शयन करती हैं और रात में ससुराल से आए अन्न से बना भोजन ग्रहण करती हैं.
  • मिट्टी की प्रतिमाएं: पूजा के लिए मिट्टी से नाग-नागिन, गौरी, शिव और हाथी की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं, जिनकी प्रतिदिन ताजे फूलों और फलों से पूजा होती है.
  • विशेष भोग: सातवें से नौवें दिन भगवान को खीर और रसगुल्ले का भोग लगाया जाता है.

मैथिली लोकगीतों से गूंजा मिथिलांचल

पूरे पर्व के दौरान घर-घर में मैथिली लोकगीतों की गूंज रहती है. अंतिम दिन पति भी पूजा में शामिल होते हैं और ससुराल पक्ष से नए वस्त्र, फल व उपहार भेजे जाते हैं. पंडित मुकेश कुमार मिश्र के अनुसार, मधुश्रावणी मिथिला की वैज्ञानिक जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने वाला अद्वितीय लोकपर्व है.

ये भी पढ़ें: बाल हृदय योजना सीतामढ़ी के बच्चों के लिए साबित हो रही जीवनदायिनी, 268 बच्चों का हुआ निःशुल्क इलाज


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By रतिकांत झा

रतिकांत पिछले करीब 17 वर्षों से पत्रकारिता में निरंतर कार्यरत हैं. उन्हें राजनीति, धर्म-अध्यात्म, पर्व-त्योहार, अपराध, सामाजिक सरोकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं जैसे बहुआयामी विषयों पर लगातार सटीक रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव प्राप्त है.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >