Sitamarhi News: सीतामढ़ी शहर के सबसे पुराने और प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में शामिल तथा किराना मंडी के रूप में प्रसिद्ध कोट बाजार की बदहाली आज भी बरकरार है. आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी यहां के दर्जनों व्यवसायी और सैकड़ों स्थानीय निवासी भीषण जलजमाव, गंदगी, दुर्गंध व मच्छरों के प्रकोप से जूझने को मजबूर हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार, जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और नगर निगम से कई बार गुहार लगाने के बावजूद इस गंभीर समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है.
24 घंटे बहता है गंदा पानी, डस्टबिन की कमी से बढ़ी आफत
इस बदहाली से सबसे अधिक परेशानी गोला चौक और उसके आसपास के इलाके में देखने को मिलती है. यह चौक जानकी स्थान, रिंग बांध, गुदरी बाजार, सोना पट्टी, बासुश्री चौक, पासवान चौक व सिनेमा रोड समेत कई प्रमुख व्यस्त मार्गों को आपस में जोड़ता है. संकरी सड़कों और गलियों के बावजूद यहां प्रतिदिन जिलेभर से बड़ी संख्या में ग्राहक व खुदरा दुकानदार थोक खरीदारी के लिए पहुंचते हैं. क्षेत्र में एक भी डस्टबिन की व्यवस्था नहीं होने के कारण सारा कचरा नालों के किनारे खुले में फेंका जाता है, जिससे नालियां पूरी तरह जाम हो जाती हैं और गंदा पानी चौबीसों घंटे सड़क पर फैला रहता है.
अधूरी ड्रेनेज योजना और जर्जर नालियों ने बढ़ाई मुसीबत
स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां की नालियां बेहद उथली और जर्जर हो चुकी हैं, जबकि क्षेत्र की आबादी और व्यापार में कई गुना इजाफा हुआ है. पिछले वर्ष से नगर निगम गोला चौक के पास जेनरेटर संचालित पंपसेट के जरिए जैसे-तैसे जलनिकासी करा रहा है, लेकिन हल्की बारिश होते ही पूरी सड़क टापू में तब्दील हो जाती है. इससे पैदल राहगीरों, स्थानीय दुकानदारों व दूर-दराज से आने वाले ग्राहकों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है.
टैक्स वसूली में आगे नगर निगम, सुविधाएं शून्य
सामाजिक कार्यकर्ता नारायण श्रीवास्तव उर्फ डिंपू, आलोक कुमार, राकेश चौधरी, राहुल कुमार, साहिल गोस्वामी, संजय कुमार व अनिल कुमार समेत अन्य प्रबुद्ध नागरिकों ने नगर निगम की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि नगर निगम नियमित रूप से भारी-भरकम टैक्स तो वसूलता है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है. बुडको की ड्रेनेज योजना को बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया है और जनप्रतिनिधियों ने भी इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की है. स्थानीय लोगों ने अब सरकार से नालों के नए सिरे से पुनर्निर्माण और जल निकासी की मुकम्मल व्यवस्था करने की मांग की है.
