जीविका दीदी: स्वतंत्रता दिवस को लेकर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की तैयारियां तेज हो गयी हैं. चोरौत प्रखंड मुख्यालय स्थित अंबेडकर चौक के समीप संस्कार जीविका समूह से जुड़ी जीविका दीदियां देशभक्ति के रंग में तिरंगे तैयार करने में जुटी हैं. समूह को प्रखंड क्षेत्र के लिए 5000 राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है.
समय पर पूरा करना है 5000 तिरंगे बनाने का लक्ष्य
संस्कार जीविका समूह की महिलाएं निर्धारित समय सीमा में सभी तिरंगे तैयार करने के लिए लगातार काम कर रही हैं. तैयार राष्ट्रीय ध्वजों को 15 अगस्त के दिन ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत लोगों तक पहुंचाया जाएगा.
सीसी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रखंड क्षेत्र में अभियान के लिए 5000 तिरंगे उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. बुधवार शाम तक सभी तिरंगे तैयार कर प्रखंड कार्यालय में जमा करा दिए जाएंगे.
तिरंगा बनाने से महिलाओं को मिला रोजगार
स्थानीय स्तर पर राष्ट्रीय ध्वज बनाने की जिम्मेदारी मिलने से जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं को रोजगार का अवसर भी मिला है. महिलाएं पूरी सावधानी के साथ तिरंगे तैयार कर रही हैं. निर्माण के दौरान राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और निर्धारित मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है.
जीविका दीदियों का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस के लिए तिरंगा तैयार करना उनके लिए सिर्फ रोजगार का काम नहीं, बल्कि गर्व का विषय भी है. राष्ट्रीय ध्वज तैयार करते हुए उन्हें देशभक्ति से जुड़ने का अवसर मिल रहा है.
15 अगस्त को घर-घर पहुंचेगा तिरंगा
अभियान के तहत तैयार किए जा रहे सभी तिरंगे स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लोगों तक पहुंचाये जाएंगे. प्रशासन का उद्देश्य अधिक से अधिक घरों तक राष्ट्रीय ध्वज पहुंचाकर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को सफल बनाना है.
जीविका दीदियों ने लोगों से अभियान में सहयोग करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को सभी लोग अपने-अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक फहराएं और स्वतंत्रता दिवस के उत्सव में भागीदारी निभाएं.
महिलाएं बोलीं- तिरंगा बनाना गर्व की बात
तिरंगा तैयार करने में मास्टर बुक कीपर गुलाबो देवी, समूह अध्यक्ष सुधा देवी, किरण देवी, अनिता देवी, विनीता देवी, निक्की देवी, चांदनी देवी, रिंकू देवी, मंजू देवी, मनतोर देवी और शोभा देवी समेत अन्य जीविका दीदियां जुटी हैं.
स्थानीय स्तर पर महिलाओं की भागीदारी से एक ओर जहां स्वतंत्रता दिवस अभियान को गति मिल रही है, वहीं जीविका समूह की महिलाओं को काम का अवसर भी उपलब्ध हो रहा है.
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