सीतामढ़ी जिले में अधवारा और जमुरा नदी के तटबंधों पर किए गए अवैध मिट्टी खनन ने आगामी बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रभात खबर की पड़ताल में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कई स्थानों पर जेसीबी (JCB) से तटबंधों को काटकर मिट्टी निकाली गई है. इसके साथ ही भारी हाइवा वाहनों की लगातार आवाजाही से ये तटबंध और भी ज्यादा क्षतिग्रस्त होकर कमजोर हो गए हैं.
वर्षों से तैनाती के बावजूद नहीं थमा खनन
रानी पुल के दक्षिणी तटबंध पर निगरानी के लिए वर्षों से स्थानीय लोगों की तैनाती की गई है, इसके बावजूद इस अवैध खनन पर कोई प्रभावी रोक नहीं लग सकी है. मौके पर मौजूद आसपास के गांवों के कुछ स्थानीय महिला-पुरुषों ने बताया कि नदी किनारे जिन लोगों की निजी जमीन थी, उनमें से कई लोगों ने अपनी मिट्टी बेच दी. इसी की आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध खनन के खेल को भी अंजाम दिया गया.
नरहा गांव के पास बचाव के लिए बांस और बालू की बोरियों का सहारा
अवैध खनन के कारण स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि नरहा गांव के पश्चिमी तटबंध के पास अत्यधिक गहराई तक मिट्टी निकाल ली गई है. इसके चलते तटबंध टूटने की कगार पर पहुंच गया है, जिसे बचाने के लिए सरकार और प्रशासन को बांस व बालू की बोरियों का सहारा लेकर कटाव रोकने का प्रयास करना पड़ा है. गांव की महिलाओं ने बताया कि यह बचाव कार्य चैत-वैशाख (गर्मी के) महीने में कराया गया था.
ग्रामीणों ने की सख्त कार्रवाई और नियमित निगरानी की मांग
मानसून की शुरुआत के साथ ही नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखकर स्थानीय ग्रामीण बेहद डरे हुए हैं. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मानसून के दौरान इन क्षतिग्रस्त तटबंधों की तत्काल मरम्मत कराने, मिट्टी के अवैध खनन पर पूरी तरह सख्त रोक लगाने और संवेदनशील इलाकों में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की है.
