परिवाद पत्र वापस लेकर मंदिर निर्माण में बनें सहायक

जगत जननी जानकी की पावन प्राक्टय स्थली, पुनौराधाम का आभामंडल जिला हीं नहीं, बल्कि संपूर्ण मिथिला क्षेत्र में व्याप्त है, जहां के कण-कण में सीता विराजमान हैं.

सीतामढ़ी. सीता रसोई के संयोजक सह सीता कुंड न्यास समिति, पुनौराधाम के पूर्व सदस्य राम शंकर शास्त्री ने बयान जारी कर कहा है कि जगत जननी जानकी की पावन प्राक्टय स्थली, पुनौराधाम का आभामंडल जिला हीं नहीं, बल्कि संपूर्ण मिथिला क्षेत्र में व्याप्त है, जहां के कण-कण में सीता विराजमान हैं. उन्होंने कहा कि आजादी के 75 वर्ष बाद तक सत्ता के केंद्र में रही कांग्रेस पार्टी श्रीराम जन्म भूमि मंदिर का निर्माण नहीं होने दिया. श्रीराम के जन्म स्थान मंदिर निर्माण के बाद जगद्गुरु के भगीरथ प्रयास के बाद उनकी सहमति से महावीर मंदिर पटना के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने सीता प्राक्टय भूमि पर 61 शिखर युक्त दिव्य सीता जन्म भूमि मंदिर का संकल्प लिया. जगद्गुरु के प्रयास से वैशाख शुक्ल नवमी जानकी प्राक्टयोत्सव के दिन राज्य सरकार ने छुट्टी घोषित की और प्राक्टय स्थली के समग्र विकास के लिए 51 एकड़ जमीन अधिग्रहण विकास की वृहद योजना प्रारंभ कर रही है. वहीं, 2010 से निरंतर जगद्गुरु श्रीरामभद्राचार्य जी महाराज के धर्म जागरण के बाद अनेक सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन दिव्य सीता मंदिर और सीता कॉरिडोर निर्माण के लिए आगे आ रहे हैं. हमें खुले दिल से उनका स्वागत अभिनंदन करना चाहिये. यहां घर-घर सीता का मंदिर होना चाहिये. जो लोग परिवाद पत्र दायर कर मंदिर निर्माण में बाधक बन रहे हैं, उनसे आग्रह है कि वे लोग परिवाद पत्र वापस लेकर मंदिर निर्माण में सहायक बनें. अब जानकी सीता स्वयं जग गयी हैं. वे लोग उनके शरणागत हो आशीर्वाद लें.

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Author: VINAY PANDEY

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