Sitamarhi News: मधुबन. मधुबन गांव निवासी दिव्यांग साहित्यकार दीपनारायण सिंह को अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से ‘साहित्य श्री सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया. बाल्यकाल में पोलियो से पीड़ित होने के कारण वे समुचित शिक्षा से वंचित रहे, लेकिन साहित्य को अपना संबल बनाकर कविता लेखन में सक्रिय रहे. हिंदी पखवाड़ा के अवसर पर बुधवार को उनके आवास पर आयोजित सादे समारोह में उन्हें अंगवस्त्र, प्रतीक चिह्न और कलम देकर सम्मानित किया गया.
पोलियो के बाद भी साहित्य को बनाया संबल
बाल्यकाल में पोलियो से प्रभावित होने के बाद दीपनारायण सिंह को शिक्षा का समुचित अवसर नहीं मिल सका. इसके बावजूद उन्होंने कठिन परिस्थितियों को अपनी रचनात्मक यात्रा में बाधा नहीं बनने दिया.
उन्होंने साहित्य और कविता लेखन को जीवन का सहारा बनाया और लगातार अपनी रचनात्मक साधना जारी रखी. उनकी साहित्यिक सक्रियता ने आसपास के लोगों और साहित्य जगत से जुड़े लोगों का ध्यान आकर्षित किया.
‘जलते दीपक’ रचना में दिखती है संघर्ष की संवेदना
दीपनारायण सिंह की रचना ‘जलते दीपक’ को उनके संघर्ष और संवेदना से जुड़ी महत्वपूर्ण रचना के रूप में देखा जाता है. साहित्य के माध्यम से उन्होंने जीवन के अनुभवों और भावनाओं को शब्द देने का प्रयास किया.
उनकी साहित्य साधना को सम्मान देते हुए अखिल भारतीय साहित्य परिषद ने उन्हें इस वर्ष के ‘साहित्य श्री सम्मान-2026’ से सम्मानित किया.
आवास पर आयोजित हुआ सादा समारोह
हिंदी पखवाड़ा के अवसर पर बुधवार को दीपनारायण सिंह के आवास पर सादे समारोह का आयोजन किया गया. अखिल भारतीय साहित्य परिषद के जिला संगठन मंत्री वाल्मीकि कुमार प्रखर की अगुवाई में हुए कार्यक्रम में साहित्य और समाज से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया.
इस दौरान डॉ. अमित कुमार और अमरनाथ कुमार ने उन्हें अंगवस्त्र, प्रतीक चिह्न और कलम देकर सम्मानित किया.
ग्रामीणों और साहित्यकारों ने दी बधाई
सम्मान समारोह में तेजनारायण सिंह, उमाशंकर सिंह, शिवेंद्र पांडेय सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे. मौके पर उपस्थित लोगों ने दीपनारायण सिंह की साहित्य साधना की सराहना की और उनके आगे के साहित्यिक जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं.
डॉ. मीनाक्षी मीनल, मुरलीधर झा मधुकर, बच्चा प्रसाद विह्वल, दिलीप शाही समेत अन्य साहित्यकारों ने भी उन्हें बधाई दी.
संघर्ष से मिली साहित्यिक पहचान
दीपनारायण सिंह का जीवन संघर्ष और रचनात्मकता के मेल का उदाहरण है. शारीरिक कठिनाइयों और शिक्षा से वंचित रहने के बावजूद उन्होंने साहित्य को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया.
‘साहित्य श्री सम्मान-2026’ मिलने के बाद उनके साहित्यिक योगदान को स्थानीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है. समारोह में मौजूद लोगों ने उनकी साहित्य साधना को आगे भी जारी रखने की शुभकामनाएं दीं.
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