सीतामढ़ी साइबर ठगी: डिजिटल दौर में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए बिहार पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर मंगलवार को सीतामढ़ी के एमपी हाइस्कूल डुमरा में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. एसपी अमित रंजन के निर्देश पर साइबर थाना की टीम ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को ऑनलाइन ठगी के तरीके और इससे बचाव के उपाय बताए. कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने कहा कि आज लोगों की गाढ़ी कमाई महज एक क्लिक में साइबर अपराधियों के हाथ लग सकती है, इसलिए ऑनलाइन लेन-देन में सावधानी बेहद जरूरी है.
इन तरीकों से हो रही ठगी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं. फर्जी कॉल और मैसेज के अलावा क्यूआर कोड, एपीके फाइल, सोशल मीडिया, फर्जी निवेश योजनाएं, केवाइसी अपडेट, ओटीपी फ्रॉड और जॉब स्कैम के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. डिजिटल अरेस्ट के नाम पर भी लोगों से डराकर पैसे ऐंठने के मामले सामने आ रहे हैं.
ओटीपी, सीवीवी और पासवर्ड किसी को न बताएं
कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों को सलाह दी गयी कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर ओटीपी, पिन, सीवीवी, पासवर्ड या बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करें. अनजान लिंक पर क्लिक करने और संदिग्ध एपीके फाइल डाउनलोड करने से भी बचने को कहा गया. पुलिस ने सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल करते समय भी सतर्क रहने की अपील की.
साइबर ठगी हो तो पहला घंटा बेहद अहम
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर ठगी का शिकार होने के बाद शुरुआती एक घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है. इसे 'गोल्डन ऑवर' बताया गया. ठगी की जानकारी मिलते ही पीड़ित को बिना देर किए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए. इसके अलावा आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत की जा सकती है या नजदीकी थाने से संपर्क किया जा सकता है.
छात्रों से दूसरों को भी जागरूक करने की अपील
कार्यक्रम के अंत में पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों से कहा कि वे खुद डिजिटल सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी साइबर ठगी से बचाव के बारे में जागरूक करें. पुलिस ने कहा कि जागरूकता और समय पर शिकायत साइबर अपराध के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार हैं.
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