Baal Hridaya Yojana: सीतामढ़ी जिले में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए बिहार सरकार की 'बाल हृदय योजना' संजीवनी साबित हो रही है. जनवरी 2021 से जुलाई 2026 तक सदर अस्पताल सीतामढ़ी के माध्यम से करीब 268 बच्चों को देश और राज्य के चुनिंदा सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में मुफ्त इलाज और सर्जरी के लिए भेजा जा चुका है.
हर माह औसतन 4 बच्चों को किया जा रहा रेफर
जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले से औसतन हर महीने 4 बच्चों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया जाता है. इस योजना के तहत मरीजों का इलाज मुख्य रूप से इन अस्पतालों में होता है:
- इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (IGIMS), पटना
- जयप्रभा मेदांता अस्पताल, पटना
- श्री सत्य साईं हार्ट हॉस्पिटल, अहमदाबाद
इन सभी संस्थानों में जांच, सर्जरी, दवा, भर्ती और विशेषज्ञ परामर्श का पूरा खर्च बिहार सरकार वहन करती है.
योजना की पात्रता और पहचान के मुख्य लक्षण
यह योजना जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए है, जो दिल में छेद या अन्य जन्मजात हृदय रोगों से पीड़ित हैं. आरबीएसके (RBSK) टीमों और विशेष शिविरों के जरिए बच्चों की पहचान की जाती है. यदि बच्चे में निम्नलिखित लक्षण दिखें तो तुरंत जांच करानी चाहिए:
- दूध पीने में कठिनाई होना या सांस फूलना.
- उम्र के हिसाब से वजन न बढ़ना.
- बार-बार निमोनिया होना या शरीर का नीला पड़ना.
- बहुत जल्दी और अत्यधिक थकान होना.
सिविल सर्जन की अभिभावकों से खास अपील
प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आरके यादव ने बताया कि नियमित स्क्रीनिंग के जरिए गंभीर बच्चों की समय पर पहचान कर उन्हें नया जीवन दिया जा रहा है. उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों में ऐसे कोई भी लक्षण दिखने पर बिना देर किए नजदीकी सरकारी अस्पताल में जांच कराएं.
ये भी पढ़ें: शिक्षिका के घर में घुसकर मारपीट, छेड़खानी और सोने की चेन छीनी, एफआईआर दर्ज
