Baba Dhurjatinath Temple: प्रखंड क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक शिव मंदिर और भगवती स्थान स्थापित हैं. इनमें धरमपुर-डुम्हारपट्टी गांव के बीच स्थित बाबा धुर्जटीनाथ महादेव मंदिर अपनी चमत्कारी कथा और बढ़ती ख्याति के कारण विशेष स्थान रखता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, 1950 के दशक में एक ज्योतिषी की सलाह पर खुदाई की गई थी. दो दिनों की मेहनत के बाद जमीन के करीब 10 फीट नीचे शिवलिंग और मंदिर का स्वरूप मिला था.
काशी विश्वनाथ समान शिवलिंग, जीर्णोद्धार में मिले थे राम दरबार के सिक्के
शिवलिंग को ऊपर लाने के प्रयास विफल होने पर श्रद्धालुओं ने उसी स्तर पर मंदिर बनाकर पूजा शुरू की.
मंदिर से जुड़ी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- खोदने पर मिले सिक्के: पंसस अरविंद चौधरी के अनुसार, वर्ष 2009 में जीर्णोद्धार के दौरान खुदाई में राजा राम दरबार के तांबा व चांदी के सिक्के मिले थे.
- काशी विश्वनाथ से तुलना: पुरातत्ववेत्ताओं ने यहां के शिवलिंग को काशी विश्वनाथ के समान बताया है. शिवलिंग पर जौ जैसा आकार होने से इन्हें 'धुर्जटीनाथ' कहा जाता है.
- सावन में उमड़ती भीड़: पुजारी नंदन गिरि ने बताया कि सावन, महाशिवरात्रि और जन्माष्टमी पर भारी भीड़ जुटती है. महाशिवरात्रि पर भक्त सिमरिया से गंगाजल लाकर जलाभिषेक करते हैं.
मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना बाबा धुर्जटीनाथ शीघ्र पूरी करते हैं.
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