आंगनबाड़ी केंद्रों पर दो महीने से THR ठप, राशन न मिलने से सेविकाओं से गाली-गलौज और मारपीट पर उतारू हुए लाभुक

सीतामढ़ी के आंगनबाड़ी केंद्रों पर दो महीने से पोषाहार नहीं मिलने से सेविकाएं परेशान हैं। लाभुकों के आक्रोश और राशन वितरण में देरी को लेकर डीएम को सौंपा गया ज्ञापन।

Sitamarhi Anganwadi: सीतामढ़ी जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर जून माह से अभी तक तीन से छह वर्ष के बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को टीएचआर (Take Home Ration) यानी सूखा राशन नहीं मिल पाया है. राशन के इस लंबे इंतजार ने अब बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. राशन न मिलने से नाराज लाभुकों का गुस्सा आंगनबाड़ी सेविकाओं पर फूट रहा है, जिससे केंद्रों पर तनाव की स्थिति बनी हुई है.

  • इस गंभीर समस्या को लेकर 'बिहार राज्य आंगनवाड़ी कर्मचारी यूनियन', सीतामढ़ी के जिला संयोजक राम बुझावन यादव और जिलाध्यक्ष रेखा कुमारी ने जिलाधिकारी (DM) को एक लिखित आवेदन देकर हस्तक्षेप की गुहार लगाई है.

ऐप पर दिख रहा 'राशन बंट गया', हकीकत में डिब्बा खाली

यूनियन द्वारा डीएम को दिए गए आवेदन में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. आवेदन के मुताबिक, जून माह में ही सभी सेविकाओं ने नियमों के तहत 'पोषण ट्रैकर ऐप' के माध्यम से एफआरएस (Facial Recognition System / Attendance) की प्रक्रिया पूरी कर दी थी. इसके बाद सभी पंजीकृत लाभुकों के मोबाइल पर राशन वितरण हो जाने का मैसेज भी चला गया.

  • मैसेज मिलने के बाद जब लाभुक राशन लेने केंद्र पर पहुंच रहे हैं, तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है. इसी तकनीकी पेंच और राशन न मिलने के कारण नाराज लाभुक अब सेविकाओं को ही दोषी मान रहे हैं और उनके साथ गाली-गलौज व मारपीट तक की धमकी दे रहे हैं.

सीडीपीओ और एलएस पर जबरन दबाव बनाने का आरोप

यूनियन ने विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि एक तरफ जहां जून महीने का राशन अब तक धरातल पर नहीं पहुंचा है, वहीं दूसरी तरफ जिले के सीडीपीओ (CDPO) और एलएस (Lady Supervisor) द्वारा सेविकाओं पर जुलाई माह का भी एफआरएस डेटा ऑनलाइन अपलोड करने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है.

यूनियन की मुख्य मांगें:

  • जुलाई एफआरएस पर लगे रोक: जब तक जून माह का बकाया टीएचआर (THR) वास्तविक रूप से लाभुकों के बीच वितरित नहीं हो जाता, तब तक जुलाई महीने के एफआरएस की बाध्यता पर तुरंत रोक लगाई जाए.
  • राशियों का हो अविलंब भुगतान: आंगनबाड़ी केंद्रों को सुचारू रूप से चलाने के लिए टीएचआर और स्कूल पूर्व पोषाहार की पेंडिंग राशि का भुगतान तुरंत सुनिश्चित किया जाए, ताकि सेविकाएं बिना किसी भय और मानसिक तनाव के काम कर सकें.


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लेखक के बारे में

राकेश पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वे प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों का व्यापक अनुभव रखते हैं. राकेश क्राइम रिपोर्टिंग के अलावा सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने के लिए जाने जाते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति और दिलचस्प किस्से-कहानियों में उनकी विशेष रुचि है.

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