Zila Parishad Aditi Kumari Case: जिला परिषद अध्यक्ष अदिति कुमारी को बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग से बड़ी राहत मिली है. विभाग ने उनके खिलाफ बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 70(5) के तहत कार्रवाई की अनुशंसा को खारिज करते हुए पूरे मामले की कार्यवाही समाप्त कर दी है.
पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने 15 जुलाई 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया. इसके साथ ही अध्यक्ष को पद से हटाने की चल रही प्रक्रिया भी समाप्त हो गई.
क्या था पूरा मामला?
यह मामला जिला परिषद की उपाध्यक्ष संझा देवी द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ा था. शिकायत में कहा गया था कि जिला परिषद की सामान्य बैठकें और स्थायी समितियों की बैठकें निर्धारित प्रावधानों के अनुसार नहीं बुलाई गईं.
साथ ही यह आरोप भी लगाया गया था कि स्थायी समितियों का गठन विधिसम्मत चुनाव प्रक्रिया के बिना किया गया. शिकायत के आधार पर लोक प्रहारी-सह-आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर ने अध्यक्ष को पद से हटाने की अनुशंसा की थी.
जांच में क्या मिला?
सुनवाई के दौरान अध्यक्ष की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों के अलावा जिलाधिकारी रिची पांडेय, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह डीडीसी संदीप कुमार की रिपोर्ट और अन्य अभिलेखों की जांच की गई.
जांच में पाया गया कि 4 जून 2022 को हुई बैठक में जिला परिषद के 32 सदस्य उपस्थित थे और सभी की सहमति से स्थायी समितियों के सदस्यों का चयन किया गया था. ऐसे में अलग से मतदान कराने की आवश्यकता नहीं थी.
विभाग ने क्या कहा?
पंचायती राज विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अधिनियम में स्थायी समितियों के गठन के लिए किसी विशेष चुनाव प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है. इसलिए समिति गठन को अवैध नहीं माना जा सकता.
बैठकों के आयोजन को लेकर भी विभाग ने माना कि अध्यक्ष की ओर से कई बार बैठक बुलाने का प्रयास किया गया था. हालांकि प्रशासनिक कारणों, अधिकारियों के स्थानांतरण, विधानसभा चुनाव और सदस्यों के अनुरोध के कारण कुछ बैठकें स्थगित हुईं.
आदेश में यह भी कहा गया कि यदि बैठक नहीं हो रही थी, तो अधिनियम के अनुसार एक-पांचवें सदस्य स्वयं बैठक बुलाने की प्रक्रिया अपना सकते थे, लेकिन ऐसा कोई प्रयास नहीं किया गया.
'साक्ष्यों से आरोप साबित नहीं हुए'
पंचायती राज विभाग के सचिव ने आदेश में कहा कि उपलब्ध अभिलेखों और साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि अध्यक्ष ने जानबूझकर अपने वैधानिक दायित्वों का पालन नहीं किया.
इसी आधार पर धारा 70(5) के तहत कार्रवाई की आवश्यकता नहीं मानते हुए मामले की कार्यवाही समाप्त कर दी गई.
अध्यक्ष ने क्या कहा?
फैसले के बाद जिला परिषद अध्यक्ष अदिति कुमारी ने इसे "सत्य और न्याय की जीत" बताया. उन्होंने कहा कि राजनीतिक द्वेष के तहत लगाए गए आरोपों का जवाब दस्तावेजों और तथ्यों से मिल गया है.
उन्होंने कहा कि अब वह पहले से अधिक मजबूती के साथ जिला परिषद और सीतामढ़ी के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगी.
