गाजे-बाजे संग िनकली भगवान श्रीराम की बरात

सीतामढ़ी : जानकी मंदिर परिसर से बरात निकली और शहर के मुख्य पथों से होते हुए पुन: मंदिर परिसर पहुंची जहां बनाये गए भव्य व आकर्षक मंडप में पूरी रात भर भगवान राम व मां जानकी की शादी का कार्यक्रम चलता रहा. शादी के दौरान वहां मौजूद बड़ी संख्या में महिला तब भावुक हो गयीं […]

सीतामढ़ी : जानकी मंदिर परिसर से बरात निकली और शहर के मुख्य पथों से होते हुए पुन: मंदिर परिसर पहुंची जहां बनाये गए भव्य व आकर्षक मंडप में पूरी रात भर भगवान राम व मां जानकी की शादी का कार्यक्रम चलता रहा. शादी के दौरान वहां मौजूद बड़ी संख्या में महिला तब भावुक हो गयीं जग मां सीता भगवान राम के साथ वैवािहक जीवन में बंध गयीं.

वहीं महिलाएं शादी की सुमधुर गीत से मंडप को गुजायमान बनायें रखीं. इससे पूर्व नगर में जब बारात निकली तो भगवान राम व मां सीता की झलकियां देखने के लिए सड़कों दोनों किनारे लाेगों की लंबी कतारें लगी थी.

हर घरों की छतों से महिला व बच्चे बारात को देख रहे थे. बहुत लोगों ने इस झलकियों को भगवान मां सीता व राम की प्रतिमूर्ति मानकर नमन किया. जनक नंदिनी जानकी की जन्मभूमि होने के नाते नगर मे हर वर्ष अग्रहण मास के शुक्ल पक्ष के पंचमी के अवसर पर जानकी मंदिर परिसर से विशाल शोभायात्रा निकाल

कर विवाह पंचमी का उत्सव मनाया जाता है. इस वर्ष भी इस पावन मौके पर बुधवार को मंदिर के महंत के नेतृत्व में जिले के श्रद्धालुओं द्वारा विशाल शोभा यात्रा सह झांकी निकाली गयी. शोभायात्रा में नगर के हजारों महिला व पुरुष शामिल हुए.
पशुमेला की रौनक होनेलगी फीकी
पूर्व में मवेशियों का एक बड़ा बाजार लगता था, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से लोग हाथी, घोड़ा व बैल समेत अन्य मवेशियों की खरीदारी करने आते थे. अब वह बात नहीं रही. फिर भी परंपरा के अनुसार विवाह पंचमी का आयोजन पूरे विधि-विधान के साथ निरंतर जारी है. आज भी विवाह पंचमी आते ही श्रद्धालुओं में मेला देखने को लेकर उत्सुकता देखी जा रही है.
अब पशु बाजार की रौनक कम होता जा रहा है. पूर्व की तुलना में अब पशु बाजार में मवेशियों की संख्या काफी कम हो गया है. इसका कारण मवेशियों पर खेती की निर्भरता कम होना बताया जाता है. बावजूद शहर में मेला का आनंद लेने आज भी दूरदराज से लोगों का आना जारी है. रेलवे स्टेशन व
बस स्टैंड में रात भर श्रद्धालुओं को आते-जाते देखा जा सकता है. बुधवार की रात को जानकी मंदिर व पुनौरा धाम में श्री सीताराम विवाह का संगीतमय आयोजन किया गया. रात भर महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने संगीतमय कीर्तन पर नाचते-गाते रहे. विधी-व्यवस्था को ले पुलिस व सशस्त्र बलों की तैनाती की गयी थी.

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