अधूरा भवन छोड़ संवेदक गायब

अधूरा भवन छोड़ संवेदक गायब फोटो नंबर-8 निर्माणाधीन पुस्तकालय भवन. सोनबरसा. प्रखंड मुख्यालय स्थित श्री नंदीपत जीतू उच्च विद्यालय के परिसर में प्रयोगशाला भवन बनाया जा रहा है. कतिपय कारणों से यह भवन आठ वर्षों से लंबित है. अधूरा भवन को छोड़ संवेदक नदारद हैं. स्कूल प्रबंधन को इसकी कोई खबर नहीं है कि आखिर […]

अधूरा भवन छोड़ संवेदक गायब फोटो नंबर-8 निर्माणाधीन पुस्तकालय भवन. सोनबरसा. प्रखंड मुख्यालय स्थित श्री नंदीपत जीतू उच्च विद्यालय के परिसर में प्रयोगशाला भवन बनाया जा रहा है. कतिपय कारणों से यह भवन आठ वर्षों से लंबित है. अधूरा भवन को छोड़ संवेदक नदारद हैं. स्कूल प्रबंधन को इसकी कोई खबर नहीं है कि आखिर काम बीच में ही क्यों रोक दिया गया और संवेदक गया. संवेदक के खिलाफ डीएम व डीइओ से शिकायत भी की गयी थी. लेकिन दोनों वरीय अधिकारियों के स्तर से न तो भवन को निर्माण कराने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया और न ही संवेदक पर कोई कार्रवाई की गयी. वर्ष 2006 में स्वीकृति गौरतलब है कि प्रयोगशाला भवन के निर्माण की स्वीकृति वर्ष 2006 में मिली थी. काम भी शुरू कराया गया और वर्ष 2008 में अचानक काम रोक दिया गया. छत की ढलाइ नहीं की गयी है. प्लास्टर भी बाकी हैं. खिड़की व दरवाजा का कोई अता-पता नहीं है. प्रधान किये थे रिपोर्ट तत्कालीन प्रधान शिक्षक महेंद्र कुमार ने लंबित भवन को ले डीएम व डीइओ को लिखा था. उनके बाद प्रधान बने बदरुल हसन बद्र ने भी दोनों पदाधिकारियों को लिखा. फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गयी. बद्र के बाद रामचंद्र महतो प्रधान की कुरसी संभाले. महतो ने सबसे पहले प्रयोगशाला भवन का निर्माण कार्य पूरा कराने को ठोस कदम उठाने के लिए डीएम व डीइओ को पत्र भेजा. उक्त तीनों प्रधान शिक्षकों के पत्रों को मानो रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया. कारण कि न तो भवन काम दोबारा आगे बढ़ा और न ही संवेदक पर कोई कार्रवाई की गयी. इस व्यवस्था से वर्तमान प्रधान शिक्षक लक्ष्मी महतो काफी क्षुब्ध हैं. वे कहते हैं कि प्रयोगशाला जरूरी है और इसकी महत्ता को आसानी से समझा जा सकता है. बावजूद भवन का लंबित रहना अफसोस की बात है.

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