रात में शहर में आना सुरक्षित नहीं

रात में शहर में आना सुरक्षित नहींसदर अस्पताल व रेलवे स्टेशन पर कराहती है मानवता.फोटो नंबर-12, शंकर चौक पर वाहन की तलाशी लेते डुमरा थानाध्यक्ष, 13, ट्रेन का इंतजार करते विश्रामालय में बैठे व लेट यात्री, 14, बगैर वरदी पहने जीआरपी में बैठा जवान, 15, यात्री का इंतजार करता रिक्शा चालक, 16, कर्मी विहीन पूछताछ […]

रात में शहर में आना सुरक्षित नहींसदर अस्पताल व रेलवे स्टेशन पर कराहती है मानवता.फोटो नंबर-12, शंकर चौक पर वाहन की तलाशी लेते डुमरा थानाध्यक्ष, 13, ट्रेन का इंतजार करते विश्रामालय में बैठे व लेट यात्री, 14, बगैर वरदी पहने जीआरपी में बैठा जवान, 15, यात्री का इंतजार करता रिक्शा चालक, 16, कर्मी विहीन पूछताछ काउंटर, 17 व 18, सूना पड़ा सरकारी बस स्टैंड व मेहसौल चौक, 19 से 27 तक सूनी व अंधेरे में डुबी शहर की सड़कें, 28, गार्ड विहीन एटीएम काउंटर, 29, सूना पड़ा जानकी मंदिर परिसर, 30, गश्ती के दौरान महंत साह पहुंची नगर थाना पुलिस, 31, नगर थाना में बैठे सहायक अवर निरीक्षक, 32, प्रसव वार्ड में भरती गर्भवती महिला व उसके परिजन, 33, खर्राटा खींच रही एएनम व ममताअमिताभ कुमार सीतामढ़ी. समय-समय पर आपराधिक घटनाओं को लेकर चर्चा में रहने वाला नगर परिषद क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोगों को अपने ऊपर आत्मनिर्भर हैं. दुकान बंद होने के बाद अधिकांश सड़कों पर अंधेरा का साम्राज्य स्थापित हो जा रहा है. उपलब्ध संसाधन में नगर थाना पुलिस चाह कर भी संतोषजनक गश्ती नहीं कर पा रही है. रात में एक सड़क का चक्कर लगाने के बाद चाह कर भी दूसरा चक्कर मारना संभव नहीं हैं. कभी-कभी आपराधिक घटनाओं का केंद्र बिंदु रहा शहर का कुछ मार्ग तो पुलिस गश्ती से वंचित भी रह जाता है. ठीक यहीं स्थित रात में स्थानीय रेलवे स्टेशन व सदर अस्पताल की हो जाती है. दोनों स्थान पर मानवता कराहती नजर आती है. शहर की सुरक्षा, अस्पताल व रेलवे स्टेशन की व्यवस्था समेत कई बिंदुओं पर प्रभात खबर ने भ्रमण कर हाल जाना है. पेश हैं आंखों देखी रिपोर्ट : जिला मुख्यालय में हो रही थी वाहन की तलाशी दिन शुक्रवार, समय रात्रि 11 बजे. जिला मुख्यालय स्थित शंकर चौक पर डुमरा थानाध्यक्ष छोटन कुमार सशस्त्र बलों के साथ मौजूद थे. इसी क्रम में एक चारपहिया वाहन को रोका जाता है. थानाध्यक्ष खुद टार्च जला कर वाहन की तलाशी ले रहे हैं. संतुष्ट हो जाने के बाद वाहन को आगे बढ़ने को कहते है. वही दोबारा दूसरी गाड़ी को रोका जाता है. कारगिल व मेहसौल चौक पर सन्नाटासमय रात्रि 11.20. शहर के कारगिल व मेहसौल चौक पर सन्नाटा पसरा हुआ था. यात्री के इंतजार में कुछ रिक्शा चालक शॉल ओढ़ कर सोये थे. एक भी पुलिसकर्मी वहां मौजूद नहीं थे. गश्ती पुलिस भी कहीं नजर नहीं पड़ी. पुन: रात्रि 2.30 बजे भी इसी तरह का दृश्य देखने को मिला. शुक्र यह था कि दोनों स्थान हाइमास्क लाइट व वेपर लाइट से चौराहा जगमग हो रहा था. हां यह अलग बात है कि दोनों स्थान के आगे के रास्ता पर अंधेरा का साम्राज्य स्थापित था. इक्के-दुक्के दुकान व मकान पर लगे बल्ब की रोशनी सड़कों पर हल्की रोशनी डाल रही थी. हालांकि शहर में प्रवेश करने वाले दोनों रास्ते लखनदेइ नदी से किरण चौक व बाइपास से बस स्टैंड तक अंधेरा छाया हुआ था. दिखायी नहीं देती गश्ती पुलिसरात्रि 12 बजे. शहर के महंत साह चौक रोशनी से जगमग हो रहा था. एक पान की दुकान खुली हुई थी. ठीक इसके विपरीत नूतन टॉकिज, शंकर टॉकिज व कोलकाता बाजार के पास सन्नाटा पसरा हुआ था. एक्सिस बैंक का एटीएम खुला हुआ था. वहां पर एक मोटरसाइकिल लावारिस अवस्था में पड़ी हुई थी. नूतन व शंकर टॉकिज में लगाये गये बल्ब से सामने के मुख्य सड़क पर थोड़ी-बहुत रोशनी हो रही थी. मीट-मछली की दुकान में असामाजिक तत्वों के जमावड़ा के कारण बदनाम सिनेमा हॉल रोड में भी गश्ती पुलिस नहीं मिली. स्थानीय एक-दो लोग खड़े थे. पूछने पर लगने नामक एक व्यक्ति ने बताया कि शाम में पुलिस की गश्ती होती है, रात में 12 बजे वह सोने चला जाता है. उसके बाद आता होगा तो नहीं पता. शाम के बाद कभी नहीं देखा. भय मुक्त वातावरण का माहौल भी दिखासमय 12.45 बजे : महंत साह व सरावगी चौक होते हुए जानकी स्थान परिसर तक भयमुक्त वातावरण का माहौल देखने को मिला. हालांकि सड़कों पर दुकानों पर लगे बल्ब की रोशनी ही आ रही थी. खास बात यह देखी गयी कि सरावगी चौक से आगे गुप्ता डेंटल केयर के डॉ राघवेंद्र कुमार गुप्ता अपने एक दूसरे प्रतिष्ठान पर मरम्मत कार्य करा रहे थे. किसी तरह का डर उनके चेहरे पर नजर नहीं आ रहा था. पूछने पर बताया कि पुलिस नियमित रूप से गश्ती करने आती है. हां इस बीच में यह जरुर देखा जा रहा था कि सड़क से सटे अधिकांश गलियों में पूरी तरह अंधेरा छाया हुआ था. रोशन की कोई व्यवस्था नगर परिषद की ओर से देखने को नहीं मिली. जानकी स्थान परिसर में अंधेरा समय 12.55. वहां से आगे बढ़ने पर जानकी स्थान परिसर में भी अंधेरा देखने को मिला. आसपास में पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ था. मंदिर के मुख्य द्वार की किवाड़ बंद थी. परिसर में छह-सात चारपहिया वाहन लगे थे. उधर से लौटने के क्रम में महंत साह चौक पर पुलिस की दो गश्ती टीम दिखी. एक पर सब इंस्पेक्टर राकेश गोसाईं सशस्त्र बलों के साथ बैठे थे. महंत साह चौक से सटे नगर थाना के परिसर में रोशनी की समुचित व्यवस्था देखने को नहीं मिली. मंदिर व थाना के अंदर जल रहे बल्ब की हल्की रोशनी परिसर में आ रही थी. सामने से एक बैंड पार्टी में शामिल कलाकार फिल्मी गाना की धुन पर मस्ती में जा रहे थे. थाना के अंदर चालक के साथ सहायक अवर निरीक्षक आसनारायण पोद्दार बात कर रहे थे. बॉक्स मेंशरीर में हरकत नहीं, तो कर दिया मृत घोषित रात्रि 11.25. स्थानीय रेलवे स्टेशन. दिल्ली जाने के लिए लिच्छवी ट्रेन के इंतजार में प्लेटफार्म व यात्री विश्रामालय खचाखच भरा था. दुर्भाग्य की बात यह थी कि रेलवे स्टेशन पर जीआरपी के एक जवान भी मुस्तैद नहीं दिखे. हालांकि सभी स्थान पर रोशनी की समुचित व्यवस्था थी. जीआरपी थाना की स्थिति काफी अव्यवस्थित दिख रही थी. थाना से बाहर सफेद चादर में एक शव लिपटा हुआ था. एक युवक बैठा था. अगरबत्ती जल रही थी. दो-तीन युवक बाहर में बैठ कर किसी बात को लेकर बकझक कर रहे थे. पूछने पर बताया गया कि एक युवक जीआरपी पुलिस है और सामने वाला मृतक का परिजन. मृतक के परिजन कमोद कुमार मिश्रा की शिकायत थी कि शुक्रवार की शाम सीतामढ़ी स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-3 पर उसके रिश्तेदार कट कर बुरी तरह घायल हो गया. उसे सदर अस्पताल न ले जाकर मृत घोषित कर जीआरपी पुलिस ने उसे जब्त कर लिया. अब वह शव का पोस्टमार्टम कराना चाहता है, तो कहा जा रहा है कि शनिवार की सुबह पोस्टमार्टम होगा. उसका रिश्तेदार नेपाली आर्मी का रिटायर जवान हैं. एक जवान के शव की बुरी गत की जा रही है. इस बाबत पूछने पर बाहर में बैठे जवान ने कुछ भी बताने से इनकार किया. कहा, अंदर में साहब हैं, उन्हीं से बात करें. थाना के अंदर एक कमरा में जीआरपी प्रभारी राजकुमार राय बैठे थे. घायल जवान को सदर अस्पताल नहीं लेकर जाने की बाबत पूछने पर बताया कि उसकी मौत हो चुकी थी. यह पूछने पर कि आपने कैसे जवान को मृत घोषित कर दिया? कहा कि, नब्ज व शरीर की हरकत को देख कर खुद निर्णय लेना पड़ता है कि घायल व्यक्ति जिंदा हैं या वह मर चुका है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि रेलवे स्टेशन पर आकर किसी चिकित्सक के द्वारा चेकअप नहीं किये जाने की असुविधा के कारण लिया गया निर्णय कभी गलत भी हो सकता है. वहां से निकलने पर सरकारी बस स्टैंड में भी पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ था. चार-पांच बस लगी थी. परिसर के समीप श्रवण मीट हाउस खुला हुआ था. जिस कारण थोड़ी-बहुत चहल-पहल थी. बॉक्स मेंदर्द से मर गयी गर्भवती महिला, नहीं आये चिकित्सकसमय 1.15 : सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में कुछ मरीज भरती थे. कोई चिकित्सक या कर्मी नहीं थे. प्रसव वार्ड में दो दर्जन से अधिक महिलाएं भरती थीं. गर्भवती महिला के कराहने की आवाज आ रही थी. प्रसव कक्ष से अटैच एक कमरा में एएनएम चिंतामणी व ममता बेड पर बेसुध सोयी थी. परिजन बेचैन दिख रहे थे. संवाददाता को देखते ही परिजनों की आंखों में चमक आ गयी. मीडियाकर्मी बताने पर अपना दर्द बयां करने लगी. गर्भवती सुनीता की मां फुलो देवी, प्रियंका की मां सीता देवी, भारती देवी की मां किरण देवी, पिंकी मिश्रा की मां उर्मिला देवी व सिकिला देवी बताती है कि गर्भवती महिलाएं दर्द से छटपट करती हैं, लेकिन देखने के लिए कोई चिकित्सक नहीं आ रहे हैं. एएनएम व ममता को कहने पर दुत्कार कर भगा देती है. अगर आर्थिक तंगी नहीं रहती तो निजी चिकित्सालय में चले जाते. आंखों में अपने व दूसरों के प्रति दर्द लिये नम आंखों से सिकिला देवी बताती है कि आज एक प्रसव पीड़िता आयी थी. घंटों दर्द से कराहती रही, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली. अतत: वह चिकित्सा के अभाव में दम तोड़ दी. उसके शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था भी अस्पताल की ओर से मुहैया नहीं करायी गयी. इसी तरह कुव्यवस्था को देख कर चार-पांच गर्भवती महिला भी अपने परिजन के साथ निजी चिकित्सालय में चली गयी. दिलचस्प यह भी था कि प्रसव वार्ड में भरती कुछ गर्भवती महिलाओं का नाम रजिस्टर में इंट्री भी नहीं किया गया था. एक जानकार ने बताया कि बिचौलियों के माध्यम से गर्भवती महिला को निजी चिकित्सालय में ले जाया जाता है. असफल होने के बाद ही महिला का नाम इंट्री किया जाता है.

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