नगर थानाध्यक्ष समेत दो निलंबित

अजय हत्याकांड : थानाध्यक्ष की लापरवाही से हत्या का आरोपित जेल से हो गया बाहर सीतामढ़ी : स्वतंत्र पत्रकार अजय विद्रोही की हत्या मामले में जेल में बंद मुख्य आरोपित अशोक सिंह के जेल से जमानत पर रिहा हो गया है. अशोक के रिहा होने के मामले में नगर थानाध्यक्ष रामाशीष कामती व सब इंस्पेक्टर […]

अजय हत्याकांड : थानाध्यक्ष की लापरवाही से हत्या का आरोपित जेल से हो गया बाहर
सीतामढ़ी : स्वतंत्र पत्रकार अजय विद्रोही की हत्या मामले में जेल में बंद मुख्य आरोपित अशोक सिंह के जेल से जमानत पर रिहा हो गया है. अशोक के रिहा होने के मामले में नगर थानाध्यक्ष रामाशीष कामती व सब इंस्पेक्टर अरुण राय की लापरवाही उजागर हुई है. एसपी हरि प्रसाद एस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच-पड़ताल के बाद सीधी कार्रवाई करते हुए इंस्पेक्टर सह नगर थानाध्यक्ष श्री कामती व सब इंस्पेक्टर अरुण राम को निलंबित कर दिया है. इंस्पेक्टर को निलंबित करने के बाद एसपी श्री प्रसाद ने जयनारायण प्रसाद को नगर थाना की कमान सौंपी है.
नवनिर्वाचित नगर थानाध्यक्ष श्री प्रसाद वर्तमान में एसपी ऑफिस में पदस्थापित थे. पुलिस विभाग में जयनारायण प्रसाद के छवि एक तेज-तर्रार पदाधिकारी के रूप में की जाती है.
शायद यही कारण है कि उन्हें एसपी ने नगर थाना की कमान सौंपी है. 1984 बैच के श्री प्रसाद इससे पूर्व आर्थिक अपराधी के नारकोटिक्स डिपार्टमेंट के अलावा पटना, मधुबनी व झारखंड के विभिन्न थाना में सफल थानाध्यक्ष साबित हो चुके है. हालांकि, श्री प्रसाद की नियुक्ति कुछ दिनों के लिए ही की गयी है. कारण है कि प्रभार ग्रहण करने के कुछ ही देर बाद पुलिस मुख्यालय से उनके तबादला की सूचना जिला मुख्यालय को भेजी गयी है. इस कारण अधिक से अधिक वे 10-15 दिनों तक अपने पद पर पदस्थापित रहेंगे.
29 सितंबर को गोली मारकर हुई थी हत्या
निलंबन के पीछे इंस्पेक्टर रामाशीष कामती व सब इंस्पेक्टर अरुण राय की घोर लापरवाही उजागर हुई है. 29 सितंबर 2015 को स्वतंत्र पत्रकार सह सिटीजन फोरम के महासचिव अजय विद्रोही की शहर के बसुश्री चौक के समीप गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी.
जिससे दो दिनों तक शहर में विधि-व्यवस्था खराब होने की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी. हत्या के मामले को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए एसपी हरि प्रसाद ने एक टीम का गठन एएसपी अभियान संजीव कुमार के नेतृत्व में किया. टीम ने साइलेंट ऑपरेशन के तहत काम करते हुए 8 अक्तूबर 2015 को मुख्य आरोपित अशोक सिंह समेत हत्या में संलिप्त सभी अपराधियों को धर दबोचा. घटना को लेकर चार प्राथमिकी दर्ज की गयी.
सोनबरसा थाना में दबोचे जाने के कारण अशोक समेत अन्य पर आर्म्स एक्ट की प्राथमिकी दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया. इसके बाद नगर थाना में विद्रोही की हत्या, बरियारपुर स्थित अशोक सिंह के राइस मिल से आर्म्स की बरामदगी को लेकर आर्म्स एक्ट व मठ की जमीन को लेकर, तीन प्राथमिकी नगर थाना में दर्ज की गयी.
हत्या, आर्म्स एक्ट व जालसाजी की तीन-तीन प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी नगर थानाध्यक्ष श्री कामती व श्री राम ने अनुसंधानकर्ता होने के बाद भी अशोक के खिलाफ न्यायालय में प्रोडक्शन वारंट नही लगाया. जिसका फायदा अशोक को न्यायालय में मिला. हुआ यह कि सोनबरसा में दर्ज आर्म्स एक्ट के मामले में अशोक को तकरीबन एक सप्ताह पूर्व जमानत मिल गयी और वह जेल से रिहा हो गया.
अगर दोनों अनुसंधानकर्ता उसके जमानत मिलने से पूर्व तीनों केस में प्रोडक्शन वारंट के लिए आवेदन देते तो अशोक जेल से बाहर नहीं आ पाता. अब पुलिस को एक बार फिर से अशोक को गिरफ्तार करने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा. यहीं कारण कि दोनों पुलिस अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई की गाज गिरी है.

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