चार साल बाद जिले में फिर गरजा एके-47

सीतामढ़ी : तकरीबन साढ़े चार माह पूर्व इलाज के दौरान अस्पताल से फरार मुकेश पाठक नामक शातिर अपराधी ने फिर से उत्तर बिहार में वारदात को अंजाम दिया है. फरारी के बाद से ही पुलिस उसे गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वो पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा. अब सुपर वाइजर हत्याकांड से […]

सीतामढ़ी : तकरीबन साढ़े चार माह पूर्व इलाज के दौरान अस्पताल से फरार मुकेश पाठक नामक शातिर अपराधी ने फिर से उत्तर बिहार में वारदात को अंजाम दिया है.

फरारी के बाद से ही पुलिस उसे गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वो पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा. अब सुपर वाइजर हत्याकांड से फिर से मुकेश की चर्चा होने लगी है. जिस तरह से एके-47 से सुपर वाइजर की हत्या की गयी है. उससे पुलिस अधिकारियों के कान खड़े हो गये हैं.
मुकेश को बिहार पिपुल्स लिबरेशन आर्मी नामक आपराधिक संगठन के चीफ संतोष झा के गिरोह का मास्टरमाइंड माना जाता है. चार साल के बाद मुकेश के कहने पर एके-47 का इस्तेमाल कर रोड सुपरवाइजर राजेंद्र प्रसाद की हत्या की घटना को अंजाम दिया गया है. इससे पूर्व मुकेश के कहने पर बिहार पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के शूटरों ने एक जून 2011 को सीतामढ़ी जिले के बेलसंड में एके-47 का इस्तेमाल कर निर्माण कंपनियों के इंजीनियर की हत्या की थी.
इसमें सिंघला कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्टर मैनेजर गया बख्स सिंह, प्रोजेक्ट इंजीनियर विकास कुमार मिश्र व रामाधीर पांडेय को गोली मारी गयी थी. बख्स सिंह व विकास कुमार मिश्र की मौत मौके पर हो गयी थी. वहीं, गंभीर रूप से घायल रामाधीर पांडेय को बचाने में एमकेएमसीएच के चिकित्सक सफल रहे.
मुखिया की हत्या कर
फैलायी सनसनी
मूल रूप से मोतीहारी जिले मेहसी थाना अंतर्गत मोरियाबाद गांव निवासी मुकेश पाठक उर्फ चुटुल पाठक ने 11 दिसंबर 2010 को मेहसी प्रखंड कार्यालय में जाकर पुसाबाद बरहरवा के मुखिया चंद्रकिशोर ठाकुर उर्फ चुन्नू ठाकुर की गोली मार कर हत्या कर दी थी. मुखिया की हत्या में मुकेश का साथ ऋ षि झा, श्याम सुंदर पाठक, पवन कुमार, गौतम ठाकुर व निकेश दुबे ने दिया था.
गिरोह का फाइनेंसियल नेटवर्क हो गया ध्वस्त
संतोष गिरोह का राइट हैंड शातिर अपराधी चिरंजीवी सागर को माना जाता है. 18 अगस्त 2013 को जिला पुलिस को चिरंजीवी के गिरफ्तारी के बाद तत्कालीन एसपी ने कहा था कि गिरोह के ओहदा में संतोष के बाद चिरंजीवी का नाम सामने आता है, जो उत्तर बिहार के कई जिला में आतंक का पर्याय बना हुआ है.
चिरंजीवी की गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता साबित हुई. कारण था कि गिरोह के अधिकांश शूटर सीधे तौर पर चिरंजीवी से जुड़े हुए थे. संतोष व मुकेश के संपर्क में चिरंजीवी के अलावा कुछ खास शूटर शामिल थे. चिरंजीवी के गिरफ्तारी के बाद गिरोह का फाइनेंसियल नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो गया.
हार्डकोर नक्सली की हत्या
में भी संलिप्त
जनवरी 2012 में हार्डकोर नक्सली गौरीशंकर झा की हत्या भी मुकेश पाठक के नेतृत्व में की गयी थी. घटना की वजह बिहार पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के चीफ संतोष झा व नक्सली गौरीशंकर झा के बीच आपसी मनमुटाव का मामला सामने आया था.
गौरीशंकर की हत्या में मुकेश के साथ चिरंजीवी सागर, लंकेश झा व निकेश दूबे ने भी गोली चलायी थी.
नक्सली के निशाने पर
है मुकेश!
मुकेश पाठक नक्सलियों के टारगेट में हिट लिस्ट पर है. इसका खुलासा फरवरी 2013 में पुलिस के हत्थे चढ़े हार्डकोर नक्सली भुट्टा पटेल ने किया था. उसने बताया कि नक्सली संगठन का मानना है कि मुकेश पाठक की ओर से आजाद हिंद फौज को मदद पहुंचायी जाती है, जबकि फौज के सदस्य नक्सलियों के जानी दुश्मन है.

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