सीतामढ़ी : ग्रामीण विकास विभाग के पत्र के आलोक में डीडीसी ए रहमान ने जिले के 66 पंचायत रोजगार सेवकों को सेवा से मुक्त कर दिया है. उक्त कार्रवाई से पीआरएस बेचैन हैं. शुक्रवार को स्थानीय परिसदन में रोजगार सेवकों का एक शिष्टमंडल ग्रामीण विकास विभाग के सचिव सह जिला के प्रभारी सचिव प्रदीप कुमार से मिला. पीआरएस के विभिन्न मांगों पर सचिव श्री कुमार ने स्पष्ट जवाब दिया. दो टूक शब्दों में कहा कि हड़ताल अवधि में जब काम हीं नहीं किये और न मजदूरों को काम मिला तो वेतन का भुगतान कैसे किया जायेगा.
काम करें तो मिलेगा वेतन
सचिव ने शिष्टमंडल को मनरेगा अधिनियम का याद दिलाया. कहा कि योजनाओं पर जो राशि खर्च होती है, उसका 1.55 फीसदी राशि वेतन पर खर्च की जाती है. योजनाओं पर राशि खर्च करें और अधिक से अधिक मानव दिवस सृजित करें तो वेतन मिलेगा और वेतन बढ़ेगा भी.
एसडीओ सदर ने समझाया
बरखास्त सभी पीआरएस एकजुट होकर सचिव श्री कुमार से मिलने के लिए परिसदन पहुंचे. सचिव एक कमरे में थे. सभी पीआरएस परिसदन के बाहर बैठ गये. इसी बीच, सदर एसडीओ संजीव कुमार पहुंचे. उन्होंने सभी को समझाया और कहा कि इतनी बड़ी संख्या में एक साथ इकट्ठा होना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है. बाद में सभी पीआरएस मान गये और एक शिष्टमंडल के रूप में सचिव से मिले.
डीडीसी करेंगे कोई कार्रवाई
पीआरएस की सेवा समाप्त करने की डीडीसी की कार्रवाई पर भी सचिव श्री कुमार ने साफ-साफ जवाब दिया. बरखास्त पीआरएस सेवा समाप्त करने की बाबत सचिव से डीडीसी की शिकायत करने गये थे. सचिव ने कहा कि वे डीडीसी से एग्रीमेंट किये हुए हैं. इस लिहाज से सेवा में बने रहने या समाप्त करने के मामले पर डीडीसी ही कोई कार्रवाई करने में सक्षम है.
पंस बनाना संभव नहीं
पीआरएस की मांगों में पंचायत सचिव के पद पर समायोजन करने का भी शामिल है. इस पर प्रधान सचिव ने कहा कि पंचायत सचिव का पद पंचायती राज विभाग का है और पीआरएस की नियुक्ति ग्रामीण विकास विभाग द्वारा की गयी है. इस स्थिति में पीआरएस को पंचायत सचिव के रूप में समायोजन करना संभव ही नहीं है.
