श्रावणी मेला 2022: देवघर जाने के लिए साइकिल से सुलतानगंज पहुंचा असम का शिवभक्त, पिता ने मांगी थी मन्नत

सुलतानगंज (Sultanganj 2022) पहुंचे विमल हुजरी ने बताया कि उनके पिता ने तीस साल पहले सुलतानगंज से जल उठाकर देवघर में बाबा बैद्यनाथ (Baba Baidyanath) पर जलाभिषेक कर मन्नत मांगी थी. उनका जन्म बाबा के प्रताप से ही हुआ है.

श्रावणी मेला अब अंतिम पड़ाव पर है, लेकिन शिव भक्तों का सुल्तानगंज आने का सिलसिला अनवरत जारी है. भागवान भोलेनात के भक्त सुल्तानगंज से जल भरकर बाबा भोले के दर्शन के लिए देवघर की ओर रवाना हो रहे हैं. सैकड़ों शिवभक्त पैदल जा रहे हैं, जबकि कई भक्त वाहन से देवघर जा रहे हैं. बीते मंगलवार को भी सुलतानगंज एक ऐसा शिवभक्त पहुंचा, जो असम से चार दिनों की लंबी साइकिल यात्रा कर सुलतानगंज पहुंचा और नमामि गंगा घाट पर स्नान ध्यान कर गंगाजल उठाकर साइकिल से ही देवघर के लिए रवाना हुए.

पिता ने मांगी थी मन्नत, बेटे ने उतारा

सुलतानगंज पहुंचे विमल हुजरी ने बताया कि उनके पिता ने तीस साल पहले सुलतानगंज से जल उठाकर देवघर में बाबा बैद्यनाथ पर जलाभिषेक कर मन्नत मांगी थी. उनका जन्म बाबा के प्रताप से ही हुआ है. विमल ने बताया कि उनके पिता ने भगवान शिवशंकर से मन्नत मांगी थी की अगर हमें पुत्र की प्राप्ति होगी तो मेरा बेटे पांच सालों तक साइकिल यात्रा करते हुए सुलतानगंज जाएगा. पिता की इसी मन्नत को पूरा करने के लिए वे तीसरे साल बाबा भोलेनाथ पर जल चढ़ाने के लिए देवघर जा रहे हैं.

750 किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचे सुलतानगंज

विमल हुजरी ने बताया कि वे साइकिल से 750 किलोमीटर की दूरी तय कर चार दिनों की यात्रा कर सुलतानगंज पहुंचे हैं. विमल ने कहा कि असम के अमोलपुर से 6 अगस्त को करीब 10:00 बजे साइकिल से यात्रा पर निकले थे और 9 अगस्त को वे सुलतानगंज पहुंचे और गंगा नदी में आस्था की डूबकी लगाकर साइकिल से ही देवघर के लिए रवाना हो रहे हैं और सावन की पूर्णिमा के दिन बाबा बैद्यनाथ पर जलाभिषेक करने के बाद बासुकीनाथ में भी जलाभिषेक करेंगे. इसके बाद वे साइकिल से ही वापस अपने घर असम के लिए रवाना होंगे.

सावन के पावन महीने का है खास महत्व

सावन के पावन महीने में बिहार के भागलपुर से झारखंड के देवघर तक विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले का आयोजन होता है. इस मेले की खास बात ये है कि ये सबसे बड़े मेले के रूप में जाना जाता है. इसे अद्भत और अनोखा बाबा भक्त, कांवरिये और इन्हीं के जत्थे में शामिल डाक बम बनाते हैं. कांवर यात्रा या डाक बम की दौड़ देखते ही बनती हैं. नंगे पांव, जमीन पर लेटकर और दौड़ते हुए बाबा धाम जाकर बाबा बैद्यनाथ को जलाभिषेक करना, एक बड़ी ख्याति प्राप्त मान्यता है. इस अलौकिक कांवर यात्रा की शुरूआत उत्तरवाहिनी गंगा तट, सुल्तानगंज से होती है.

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