Sheikhpura News : (उमेश कुमार) शेखपुरा जिला के बरबीघा प्रखंड के सामास बुजुर्ग पंचायत में मंगलवार को आयोजित सहयोग शिविर कार्यक्रम के दौरान एक अलग ही मामला चर्चा का केंद्र बन गया. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आगमन के बीच स्थानीय पंचायत की निर्वाचित महिला मुखिया बेबी देवी मंच पर जगह नहीं मिलने से नाराज नजर आईं. उन्होंने इसे महिला जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा बताते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए.
मंच पर स्थान नहीं मिलने से जताई नाराजगी
कार्यक्रम के दौरान महिला मुखिया बेबी देवी ने कहा कि पंचायत की निर्वाचित प्रतिनिधि होने के बावजूद उन्हें मंच पर बैठने का अवसर नहीं दिया गया. उन्होंने इसे जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ा मामला बताते हुए अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से व्यक्त की.
महिला सम्मान सिर्फ भाषणों तक सीमित
मुखिया बेबी देवी ने कहा कि सरकार एक ओर महिलाओं को आरक्षण और सम्मान देने की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर महिला जनप्रतिनिधियों की अनदेखी की जाती है. उन्होंने कहा कि यदि जनता द्वारा चुनी गई महिला मुखिया को ही उचित सम्मान नहीं मिलेगा, तो महिला सशक्तिकरण की बातें केवल भाषणों तक ही सीमित रह जाएंगी.
पंचायत स्तर पर काम करने वालों को किया जा रहा नजरअंदाज
उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधि लगातार जनता की समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करते हैं. इसके बावजूद बड़े सरकारी कार्यक्रमों में स्थानीय प्रतिनिधियों को महत्व नहीं दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. इससे जनप्रतिनिधियों का मनोबल भी प्रभावित होता है.
कार्यक्रम में चर्चा का विषय बना मामला
महिला मुखिया की नाराजगी कार्यक्रम के दौरान लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही. कई लोगों ने इसे स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया. हालांकि कार्यक्रम आयोजकों या प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
मुखिया प्रतिनिधि ने भी साधा निशाना
मुखिया प्रतिनिधि पिंटू पासवान ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बात करने वाली राजनीतिक पार्टियों को पहले अपने कार्यक्रमों में महिला जनप्रतिनिधियों को सम्मान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि जनता द्वारा चुनी गई महिला प्रतिनिधि को मंच पर स्थान नहीं मिलना कई सवाल खड़े करता है.
राजनीतिक गलियारों में शुरू हुई चर्चा
घटना के बाद स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है. लोगों का कहना है कि महिला सशक्तिकरण के दावों को जमीनी स्तर पर भी दिखना चाहिए और निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों को उचित सम्मान मिलना चाहिए.
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले पर प्रशासन या कार्यक्रम प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि इस विवाद पर संबंधित पक्ष क्या सफाई देते हैं और आगे ऐसी स्थिति से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.
