Bharatiya Kisan Union: भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने शनिवार को जिले के बाढ़ प्रभावित घाटकोसुम्भा प्रखंड के साथ-साथ सुखाड़ प्रभावित पांच प्रखंडों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया. किसान यूनियन के नेताओं ने चेवाड़ा, अरियरी, शेखपुरा, शेखोपुरसराय और बरबीघा प्रखंड क्षेत्रों में किसानों और ग्रामीणों से बातचीत कर बाढ़ और सुखाड़ से उत्पन्न स्थिति की जानकारी ली.
दौरे में किसान यूनियन के प्रदेश संयोजक सुरेश प्रसाद के साथ किसान अजय यादव, सुबोध कुमार, उपेंद्र प्रसाद, रंजन कुशवाहा, शिव शंकर प्रसाद सहित अन्य लोग शामिल थे.
गंगा का पानी आने से घाटकोसुम्भा में बाढ़ की स्थिति
विभिन्न प्रखंडों के दौरे के बाद किसान यूनियन के प्रदेश संयोजक सुरेश प्रसाद ने बताया कि घाटकोसुम्भा प्रखंड में गंगा का पानी आने से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. उनके अनुसार, बाढ़ के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. किसानों की फसलें पानी में डूबने से नुकसान हुआ है.
उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण कई लोग घरों में रहने को मजबूर हैं. ग्रामीणों के सामने पीने के लिए स्वच्छ पानी और पशुओं के लिए चारे की समस्या भी उत्पन्न हो गयी है. बाढ़ की स्थिति के कारण प्रखंड क्षेत्र के स्कूलों के भी बंद होने की बात कही गयी.
घाटकोसुम्भा को बाढ़ग्रस्त घोषित करने की मांग
किसान यूनियन के प्रदेश संयोजक ने सरकार से बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत सहायता उपलब्ध कराने की मांग की. उन्होंने घाटकोसुम्भा प्रखंड को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग भी की, ताकि प्रभावित परिवारों को आपदा राहत का लाभ मिल सके.
पांच प्रखंडों में सुखाड़ की स्थिति का दावा
किसान यूनियन के नेताओं ने जिले के चेवाड़ा, अरियरी, शेखोपुरसराय, बरबीघा और शेखपुरा सदर प्रखंड में बारिश और पानी की कमी के कारण धान की फसलों के प्रभावित होने का दावा किया. उन्होंने सरकार से इन क्षेत्रों के किसानों को सुखाड़ आपदा के तहत राहत अनुदान देने की मांग की.
सुरेश प्रसाद ने कहा कि किसानों को एक एकड़ में फसल तैयार करने में करीब 10 हजार रुपये की लागत आती है. जिले में बड़े पैमाने पर किसानों ने धान की खेती की है, लेकिन पानी की कमी के कारण फसलें प्रभावित हो रही हैं. उन्होंने सुखाड़ से प्रभावित किसानों को भी सरकार की ओर से मुआवजा देने की मांग की.
