शेखपुरा से उमेश, सत्येन्द्र व रंजीत कुमार की रिपोर्ट
Sheikhpura BPSC 70th Toppers News: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के ऐतिहासिक परिणामों ने शेखपुरा जिले के प्रशासनिक गलियारे और शैक्षणिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है. 20 जून की शाम जारी हुए नतीजों में शेखपुरा जिले के दो सगी बहनों सहित कुल सात प्रतिभावान अभ्यर्थियों ने अपनी मेधा का ऐसा लोहा मनवाया है कि पूरा जिला देश के मानचित्र पर चमक उठा है. इस महा-सफलता की सबसे खूबसूरत बात यह है कि सफल होने वाले युवाओं में किसान, मजदूर, छोटे व्यवसायी और कामकाजी पृष्ठभूमि के बच्चे शामिल हैं, जिन्होंने फादर्स डे के पावन मौके पर अपने माता-पिता को जीवन का सबसे अनमोल प्रशासनिक उपहार भेंट किया है.
फादर्स डे पर सगी बहनों जया और विजया ने पिता को दिया ‘अफसर’ का तोहफा
बरबीघा शहर के श्रीकृष्ण चौक के समीप रहने वाले प्रतिष्ठित स्टील पाइप व्यवसायी प्रवीण कुमार के घर में दोहरी खुशी का महा-उत्सव मनाया जा रहा है. उनकी दो सगी पुत्रियों जया लक्ष्मी और विजया लक्ष्मी ने एक साथ कड़ा संघर्ष करते हुए 70वीं बीपीएससी परीक्षा को क्रैक कर लिया है. दोनों सगे भाई-बहनों का चयन बिहार प्रशासनिक सुधार के तहत राजस्व पदाधिकारी (Revenue Officer) के पद पर हुआ है.
दोनों बहनों का ननिहाल बरबीघा प्रखंड के तोयगढ़ गांव में है. उनके नाना स्वर्गीय रामनरेश सिंह बरबीघा नगर परिषद में एक समर्पित कर्मी थे. परिवार का कहना है कि दोनों बेटियों को पढ़ाई और अनुशासन के संस्कार विरासत में मिले हैं, जिससे पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है.
मालदह गांव के मृगांक भूषण ने हासिल की 199वीं रैंक, बने एसडीएम (SDM)
बरबीघा प्रखंड के मालदह गांव निवासी साधारण किसान संजय सिंह के प्रतिभावान पुत्र मृगांक भूषण ने पूरे सूबे में अपनी मेधा का डंका बजाया है. मृगांक ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में शानदार 199वीं रैंक हासिल की है और उनका चयन सीधे बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) के अंतर्गत अनुमंडल पदाधिकारी यानी एसडीएम (SDM) के पद पर हुआ है. मृगांक की शुरुआती शिक्षा-दीक्षा उनके ननिहाल लखीसराय के सदाय बीघा गांव में नाना-नानी की देखरेख में हुई. इसके बाद उन्होंने पटना के ज्ञान निकेतन से स्कूली शिक्षा पूरी की और एनआईटी (NIT) वारंगल से बीटेक (B.Tech) की डिग्री ली. मृगांक के दादा वीरेंद्र सिन्हा महान समाजसेवी और आचार्य विनोबा भावे के परम अनुयायी थे. मृगांक ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय अपनी माता जयरानी देवी के त्याग को दिया है.
पहले ही प्रयास में बीडीओ बने वैभव सिंह
बरबीघा शहर के सकलदेव नगर में रहने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक कुमार धीरेन्द्र और लक्ष्मी कुमारी के पुत्र वैभव सिंह ने अपने पहले ही प्रयास में बीपीएससी परीक्षा फतह कर ली है. वैभव मूल रूप से नालंदा जिले के तोड़ा ग्राम के निवासी हैं. उन्होंने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 456वां रैंक प्राप्त कर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) का पद हासिल किया है.
सुधांशु शेखर और निदेशक रोहित प्रसाद सिंह ने बताया कि वैभव बचपन से ही कुशाग्र थे. उन्होंने साल 2014 से रिकॉर्ड अंकों के साथ 10वीं पास की, फिर 2016 में आईआईटी परीक्षा क्रैक कर आईआईटी (IIT) खड़गपुर से बीटेक किया. वह वर्तमान में एक प्रतिष्ठित कंपनी में इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे और पहले ही चांस में बीडीओ बनकर स्कूल का मान बढ़ाया है.
पटना में मजदूरी करने वाले पिता के बेटे सुमन बने पंचायती राज पदाधिकारी
बरबीघा प्रखंड के ही शेखपुरवा गांव से एक ऐसी मर्मस्पर्शी और कड़क सफलता की कहानी सामने आई है, जिसने साबित कर दिया कि गरीबी कभी इरादों को नहीं रोक सकती. गांव के रहने वाले सुमन कुमार ने अपने पहले ही प्रयास में बीपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (BPRO) का पद हासिल किया है.
सुमन के पिता सत्येंद्र सिंह अपने परिवार की आजीविका के लिए पटना में रहकर मजदूरी का कठिन कार्य करते हैं, जबकि माता गृहिणी हैं. दो भाइयों में बड़े सुमन की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से हुई, जिसके बाद उन्होंने कॉलेज ऑफ कॉमर्स पटना से बी.कॉम किया. सुमन ने प्रारंभिक परीक्षा के लिए बिना किसी बड़े कोचिंग के पूरी तरह स्वाध्याय (Self Study) किया और मुख्य परीक्षा के लिए ऑनलाइन कोर्स की मदद ली.
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स में कार्यरत अनुराग वर्मा बने श्रम प्रवर्तन अधिकारी
नगर पंचायत चेवाड़ा के आजाद मोहल्ला निवासी अनुराग वर्मा ने भी अपने पहले ही प्रयास में 70वीं बीपीएससी परीक्षा पास कर अपनी मेधा को साबित किया है. अनुराग का चयन श्रम संसाधन विभाग में श्रम प्रवर्तन अधिकारी के पद पर हुआ है.
अनुराग संप्रति गाजियाबाद स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), रक्षा मंत्रालय में एक कुशल पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने दूरभाष पर बताया कि सिविल सेवा के लिए लयबद्ध पढ़ाई और निरंतरता बेहद जरूरी है.
अनुराग के पिता यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस में सहायक प्रशासनिक अधिकारी रह चुके हैं, उनकी बहन रेलवे बोर्ड में अधिकारी हैं, छोटा भाई बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और उनके चाचा राजेश्वर लाल भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय में उप सचिव के पद पर तैनात हैं. अनुराग ने अपनी सफलता का श्रेय अपने स्वर्गीय दादा लखन लाल और दादी जयवती देवी के आशीर्वाद को दिया है.
7 साल से नौकरी कर रहे हुसैनाबाद के स्वयं राज बने असिस्टेंट डायरेक्टर
अरियरी प्रखंड के हुसैनाबाद गांव के रहने वाले स्वयं राज ने कड़े संघर्षों के बीच अपनी नौकरी की जिम्मेदारियों को निभाते हुए बीपीएससी की परीक्षा में शानदार सफलता दर्ज की है. स्वयं राज ने पूरे सूबे में 539वीं रैंक हासिल की है और उनका चयन समाज कल्याण विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर के पद पर हुआ है.
स्वयं राज के पिता प्रदीप कुमार गांव में ही एक छोटी सी आटा चक्की और सीमेंट की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि मां सारिका देवी गृहिणी हैं. स्वयं राज साल 2019 से ही रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने हुसैनाबाद और संस्कार पब्लिक स्कूल से शुरुआती पढ़ाई करने के बाद नवादा से इंटर और दिल्ली इग्नू (IGNOU) से ग्रेजुएशन किया.
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मालदह के किसान पुत्र मृगांक के साथ अरियरी के अभ्यर्थियों में भी उत्साह
इन छह बड़े नामों के साथ ही बरबीघा के मालदह गांव निवासी एक और प्रतिभावान अभ्यर्थी ने भी इस संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता की सूची में अपना नाम दर्ज कराया है, जिससे पूरे कलेक्ट्रेट क्षेत्र और ग्रामीण इलाकों में हर्ष का माहौल है. एक ही दिन में शेखपुरा के सात अलग-अलग घरों से अधिकारियों की टोली निकलने की इस ऐतिहासिक घटना पर कलेक्ट्रेट के वरीय अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सभी होनहारों को गुलदस्ता भेंट कर और बधाई संदेश भेजकर उनके उज्ज्वल व लोक-कल्याणकारी प्रशासनिक भविष्य की कामना की है.
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