शेखपुरा : 800 फीट ऊंचे गिरिहिंडा पहाड़ पर विराजमान हैं बाबा कामेश्वर नाथ, भीम से जुड़ी है मंदिर की मान्यता

शेखपुरा जिले के 800 फीट ऊंचे गिरिहिंडा पहाड़ पर स्थित बाबा कामेश्वर नाथ मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रमुख केंद्र है. महाभारत काल से जुड़ी मान्यताओं के कारण इस ऐतिहासिक स्थल पर सावन और महाशिवरात्रि पर भारी संख्या में शिवभक्त पहुंचते हैं, जिसे पर्यटन विभाग ने भी प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल किया है.

शेखपुरा जिले के गिरिहिंडा पहाड़ की चोटी पर स्थित बाबा कामेश्वर नाथ मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है. लगभग 800 फीट ऊंचे इस पहाड़ पर विराजमान भगवान शिव के इस प्राचीन मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, जबकि सावन, महाशिवरात्रि और श्रावणी मेले के दौरान हजारों की संख्या में शिवभक्त जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह स्थल अपने ऐतिहासिक महत्व और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण भी पूरे बिहार में प्रसिद्ध है.

महाभारत काल से जुड़ा है गिरिहिंडा पहाड़ का इतिहास

स्थानीय मान्यताओं और जनश्रुतियों के अनुसार गिरिहिंडा पहाड़ का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है. कहा जाता है कि वनवास के दौरान पांडव इस क्षेत्र में पहुंचे थे और महाबली भीम ने यहां भगवान शिव की आराधना कर शिवलिंग की स्थापना की थी. समय के साथ यह स्थान बाबा कामेश्वर नाथ धाम के रूप में प्रसिद्ध हो गया.

हालांकि इन मान्यताओं के स्पष्ट ऐतिहासिक और पुरातात्विक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन सदियों से चली आ रही लोक परंपराओं ने इस मंदिर को विशेष धार्मिक पहचान दिलाई है.

प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की संभावनाएं

मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ पर सीढ़ियों और मार्ग की व्यवस्था की गई है. शिखर पर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं को शेखपुरा शहर और आसपास के गांवों का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है.

वर्षा ऋतु में हरियाली से आच्छादित गिरिहिंडा पहाड़ का नजारा लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करता है. यही कारण है कि धार्मिक पर्यटकों के साथ-साथ प्रकृति प्रेमी और युवा भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं.

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा कामेश्वर नाथ के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं. सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है.

महाशिवरात्रि के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें शेखपुरा के अलावा नवादा, नालंदा, लखीसराय, जमुई तथा अन्य जिलों से हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं.

पर्यटन विभाग ने किया है शामिल

बिहार पर्यटन विभाग ने भी गिरिहिंडा पहाड़ को जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल किया है. स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यहां आधारभूत सुविधाओं, रोपवे, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और पर्यटक सुविधाओं का और विस्तार किया जाए तो बाबा कामेश्वर नाथ मंदिर बिहार के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकता है.

आस्था, इतिहास और प्रकृति का यह अद्भुत संगम शेखपुरा की सांस्कृतिक धरोहर का गौरवपूर्ण प्रतीक बना हुआ है.


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By Satyendra Kumar

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