शेखपुरा के जवाहर नवोदय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी, 4323 स्थायी पद खाली, 5841 पदों पर भर्ती की तैयारी

Sheikhpura Jawahar Navodaya Vidyalaya : जवाहर नवोदय विद्यालयों में स्थायी प्राचार्य, शिक्षकों और वार्डन की भारी कमी है, जिससे शिक्षा और आवासीय व्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है. 4323 शिक्षक पदों के रिक्त होने के कारण संविदा शिक्षकों के सहारे पढ़ाई चल रही है. जानिए इस समस्या का पूरा विवरण.

Sheikhpura Jawahar Navodaya Vidyalaya : शेखपुरा में ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा देने वाले जवाहर नवोदय विद्यालयों में स्थायी प्राचार्य, शिक्षकों और वार्डन की कमी का मुद्दा सामने आया है. नवोदय विद्यालय समिति स्टाफ एसोसिएशन के राष्ट्रीय उप महासचिव और अंग्रेजी शिक्षक अरुण कुमार शाह के अनुसार कर्मचारियों की कमी का असर विद्यालय की शैक्षणिक और आवासीय व्यवस्था पर पड़ रहा है.

नवोदय विद्यालयों में 4323 स्थायी शिक्षक पद रिक्त

अरुण कुमार शाह ने बताया कि पिछले संसद सत्र के दौरान सरकार की ओर से दी गयी जानकारी के अनुसार नवोदय विद्यालय समिति में शिक्षकों के 4,323 स्थायी पद रिक्त हैं. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में पद खाली रहने के कारण कई विद्यालयों में संविदा शिक्षकों के सहारे पढ़ाई संचालित करनी पड़ रही है.

बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर असर

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कमी का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है. विशेष रूप से वार्षिक बोर्ड परीक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित होने की आशंका है. वहीं, उपलब्ध स्थायी शिक्षकों पर भी अतिरिक्त शैक्षणिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ रहा है.

5841 शिक्षक और गैर शिक्षक पदों पर भर्ती की जानकारी

अरुण कुमार शाह के अनुसार सरकार ने चालू शैक्षणिक वर्ष में नवोदय विद्यालय समिति में 5,841 शिक्षक और गैर शिक्षक पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी संसद में दी है. उनका कहना है कि रिक्त पदों को जल्द भरने से विद्यालयों में स्थायी व्यवस्था मजबूत होगी और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा.

24 घंटे की आवासीय व्यवस्था में वार्डन की कमी बड़ी चुनौती

जवाहर नवोदय विद्यालय 24 घंटे की आवासीय व्यवस्था वाले संस्थान हैं. ऐसे में केवल कक्षा में पढ़ाई ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के हॉस्टल, मेस और दैनिक गतिविधियों की निगरानी भी महत्वपूर्ण होती है. अरुण कुमार शाह ने बताया कि अलग से स्थायी शिक्षक और वार्डन नहीं होने के कारण कई शिक्षकों को हाउस मास्टर या वार्डन का अतिरिक्त दायित्व दिया जाता है.

शिक्षकों पर बढ़ रहा अतिरिक्त शारीरिक और मानसिक दबाव

शिक्षकों को दिनभर शिक्षण कार्य करने के बाद हॉस्टल की निगरानी और अन्य आवासीय जिम्मेदारियां भी संभालनी पड़ती हैं. उनका कहना है कि इससे स्थायी और संविदा दोनों तरह के शिक्षकों पर अतिरिक्त शारीरिक और मानसिक दबाव बढ़ता है. साथ ही विद्यार्थियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी पर्याप्त आवासीय स्टाफ की जरूरत है.

वार्डन कैडर में अलग से शिक्षकों की तैनाती की मांग

अरुण कुमार शाह ने मांग की कि विद्यार्थियों के हॉस्टल और मेस की व्यवस्था की निगरानी के लिए जवाहर नवोदय विद्यालयों में वार्डन कैडर के तहत अलग से स्थायी व्यवस्था की जाए. उनका कहना है कि आवासीय विद्यालयों में दिन-रात विद्यार्थियों की देखभाल के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता जरूरी है.

1 जनवरी 2004 से पहले नियुक्त कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन की मांग

नवोदय विद्यालय समिति स्टाफ एसोसिएशन की ओर से 1 जनवरी 2004 से पहले नियुक्त सभी नवोदय कर्मियों के लिए लंबित पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग भी की गयी है. संगठन का कहना है कि कर्मचारियों की सेवा संबंधी लंबित मांगों के समाधान के साथ विद्यालयों की स्थायी व्यवस्था को मजबूत किया जाना जरूरी है.

स्थायी व्यवस्था मजबूत होने से ग्रामीण प्रतिभाओं को मिलेगा लाभ

अरुण कुमार शाह ने कहा कि जवाहर नवोदय विद्यालयों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है. स्थायी शिक्षक, प्राचार्य और वार्डन समेत पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता से शिक्षक विद्यार्थियों को बेहतर तरीके से शिक्षित और मार्गदर्शन कर सकेंगे.

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By Niranjan Kumar

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