शेखपुरा: व्यवहार न्यायालयों में 7,527 लिपिक पदों के पुनर्गठन को बिहार कैबिनेट की मंजूरी; प्रोन्नति का रास्ता साफ, कर्मचारियों में खुशी की लहर

बिहार कैबिनेट ने व्यवहार न्यायालय के लिपिकों के पदों के पुनर्गठन को मंजूरी दी, जिससे हजारों कर्मचारियों की वर्षों से लंबित प्रोन्नति की राह आसान हो गई है।

Sheikhpura News: बिहार के व्यवहार न्यायालयों (सिविल कोर्ट) में कार्यरत कर्मचारियों की वर्षों से लंबित प्रोन्नति की राह आखिरकार खुल गई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बिहार कैबिनेट की बैठक में उच्चवर्गीय लिपिक (ग्रेड-III) के स्वीकृत 7,527 पदों के पुनर्गठन के प्रस्ताव को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है. कैबिनेट के इस बड़े फैसले के बाद शेखपुरा जिला व्यवहार न्यायालय सहित पूरे राज्य के न्यायालय कर्मियों में उत्साह और हर्ष का माहौल है.

पदों के उत्क्रमण का नया प्रशासनिक ढांचा

स्वीकृत पुनर्गठन प्रस्ताव के अनुसार, पूर्व के एकल ढांचे को त्रिस्तरीय पदोन्नति व्यवस्था में रूपांतरित किया गया है:

  • उच्चवर्गीय लिपिक (ग्रेड-I): कुल 1,098 पद उत्क्रमित किए गए हैं.
  • उच्चवर्गीय लिपिक (ग्रेड-II): कुल 1,478 पद उत्क्रमित किए गए हैं.
  • उच्चवर्गीय लिपिक (ग्रेड-III): कुल 4,951 पद अपने मूल स्वरूप में यथावत बने रहेंगे.

पदों के इस पुनर्संतुलन से लंबे समय से एक ही पद पर काम कर रहे हजारों लिपिकों के लिए पदोन्नति के नए अवसर सृजित हो गए हैं.

शेखपुरा कोर्ट परिसर में बंटी मिठाई, कर्मचारियों ने जताई खुशी

कैबिनेट की स्वीकृति की जानकारी मिलते ही शेखपुरा जिला व्यवहार न्यायालय परिसर में कार्यरत कर्मियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया और बधाई दी. कर्मचारियों ने इस फैसले को वर्षों के सतत संघर्ष, संगठन की एकजुटता और धैर्य की ऐतिहासिक जीत बताया. खुशी व्यक्त करने वालों में जिला न्यायालय कर्मचारी संघ से जुड़े शंकर कुमार, मंजेश, अजीत कुमार, विकास कुमार, धीरेंद्र कुमार, धीरज, अनिल कुमार, रोहित कुमार सहित दर्जनों कर्मी शामिल रहे.

अब प्रोन्नति प्रक्रिया अविलंब पूरी करे प्रशासन: अजीत कुमार (कोट)

"स्वीकृत पदों का पुनर्गठन व्यवहार न्यायालय कर्मियों के हित में एक ऐतिहासिक और सकारात्मक प्रशासनिक निर्णय है. वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए यह निर्णय नई आशा की किरण लेकर आया है. पदों की उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद अब पटना उच्च न्यायालय और राज्य सरकार को चाहिए कि पात्रता नियमों के अनुसार योग्य कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया को अविलंब पूरा कराएं, ताकि कर्मियों को उनका वाजिब हक मिल सके. इस संवेदनशील निर्णय के लिए हम माननीय पटना उच्च न्यायालय एवं बिहार सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हैं." अजीत कुमार, प्रदेश संगठन सचिव सह जिला मीडिया प्रभारी, बिहार राज्य व्यवहार न्यायालय कर्मचारी संघ

कर्मचारियों का मानना है कि इस निर्णय से न केवल उनके मनोबल में भारी वृद्धि होगी, बल्कि न्यायालयीन कार्यप्रणाली और प्रशासनिक दक्षता में भी तेजी आएगी. अब सभी की निगाहें उच्च न्यायालय एवं विभागीय स्तर पर अगली औपचारिक पदोन्नति अधिसूचना पर टिकी हैं.

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By Niranjan Kumar

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