बदलते शिवहर को नया रूप देने की हो कोशिश

शिवहर : बागमती नदी के आंचल में बसा शिवहर जिला कभी सीतामढ़ी जिला का अंग था. किंतु छह अक्तूबर 1994 को शिवहर जिला की स्थापना हुई. उसके बाद यह स्वतंत्र अस्तित्व में आया. बिहार सरकार के तत्कालीन मंत्री रघुनाथ झा ने अपने बूते पांच प्रखंडों को जोड़कर शिवहर जिला का स्थापना कराया. आज शिवहर भारत […]

शिवहर : बागमती नदी के आंचल में बसा शिवहर जिला कभी सीतामढ़ी जिला का अंग था. किंतु छह अक्तूबर 1994 को शिवहर जिला की स्थापना हुई.

उसके बाद यह स्वतंत्र अस्तित्व में आया. बिहार सरकार के तत्कालीन मंत्री रघुनाथ झा ने अपने बूते पांच प्रखंडों को जोड़कर शिवहर जिला का स्थापना कराया. आज शिवहर भारत के मानचित्र पर जिला के रूप में स्थापित है. जिला स्थापना हुई तो आदर्श मध्य विद्यालय में अस्थायी तौर पर समाहरणालय बनाया गया. उसके बाद जिले के विकास के नये आयाम जुड़ने लगे. जिले में डुब्बा घाट पुल, पिपराही पुल के साथ कई पुल पुलिया व सड़कों का निर्माण हुआ.

जिससे जिले के बदरंग स्वरूप को नया रूप मिला. केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय की स्थापना ने जिले के बच्चों के शिक्षा के लिए बेहतर अवसर प्रदान किया. जबकि एक दिसंबर 2012 से व्यवहार न्यायलय विधिवत कार्य करना शुरू कर दिया. उसके बाद जिले के लोगों को सस्ता व सुलभ न्याय मिलने लगा. जिले में डूब्बा घाट पुल निर्माण से शिवहर- सीतामढ़ी का आवागमन सुलभ हो गया. पूर्व में डूब्बा घाट से होकर लोग नाव से बागमती नदी पार कर सीतामढ़ी कोर्ट या अन्य काम से आते जाते है. ऐसे में डूब्बा घाट पार करने के लिए लोग��ं को घंटों नाव का इंतजार करना पड़ता था.

इस पुल के निर्माण से जहां शिवहर सीतामढ़ी की दुरियां कम हुई. वही यात्रा के दौरान समय की भी बचत होने लगी. शिवहर -सीतामढ़ी के 26 किलोमीटर की दूरी लोग पूर्व में करीब चार पांच घंटे के समय में तय करने थे. अब बाइक से करीब 30 मिनट में शिवहर से सीतामढ़ी पहुंचा जा सकता है. वही पिपराही पुल बनने से पुरनहिया के लोगों का जिला मुख्यालय तक आने का रास्ता आसान हो गया.

शिवहर से नेपाल तक आने जाने वाले लोगों की भी यात्रा सुलभ हो गयी. लगातार प्रलंयकारी बाढ़, सुखाड़ आदि प्राकृतिक आपदाओं प्रहार झेलते हुए भी शिवहर विकास के पथ पर अग्रसर है. लेकिन आज भी शिवहर जिला में कई कार्य अधूरे व बाकी है. जिसको पूरा करने की मांग की जाती रही है. नक्सली व अपराधिक घटनाओं में कमी आयी. किंतु कभी कभी अपराधी पुलिस को चुनौती भी देते रहे हैं.

उच्च शिक्षा प्राप्त करना युद्ध जितने से कम नहीं: सरकार द्वारा डिग्री कॉलेज के शैक्षणिक सत्र संचालन का आदेश दे दिया गया. किंतु आज भी प्रोफेसर व कर्मियों के कमी के कारण शैक्षणिक सत्र का संचालन नहीं हो रहा है. ऐसे में जिले के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना युद्ध जितने से कम नहीं है. वर्तमान में कॉलेज में दो प्रोफेसर की नियुक्ति हुई है. किंतु कर्मी के अभाव में उच्च शिक्षा प्राप्त करना जिले के छात्रों के लिए आज भी मुश्किल बना हुआ है. इस कॉलेज में सत्र 2017-20 में कला व वानिज्य संकाय में 431 नामांकन हुए. सत्र 2018-21 में करीब 620 नामांकन हुए. सत्र 2019-22 में अब तक करीब 150 बच्चों ने नामांकन लिया है. किंतु बिना पढ़ाई के कैसे परीक्षा देंग, छात्रों के लिए समस्या बनी हुई है.

रेल के लिए आज भी लालायित हैं शिवहर के लोग: जिला स्थापना के करीब 25 वर्ष के बाद भी जिला रेल सुविधा से नहीं जुड़ सका है. जिला को रेल सेवा से जोड़ने की मांग युवाओं व समाजिक संगठनों द्वारा की जाती रही है. वर्ष 2006-2007 के रेलवे बजट में उक्त रेल परियोजना को शामिल किया गया था. उसके बाद उसे ठंढ़े बस्ते में डाल दिया गया.

खोरी पाकड़ अदौरी पुल निर्माण की होती रही है मांग: जिले के पुरनहिया प्रखंड में बागमती नदी पर खोरी पाकड़ अदौरी पुल निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है. किंतु यह मामला आज तक लंबित है. पुल निर्माण संघर्ष समिति के संयोजक संजय सिंह ने शपथ ले रखी है कि जनसरोकार से जुड़े इस पुल का जब तक निर्माण नहीं होगा. तब तक दाढ़ी नहीं बनबाऐंगे.

अधर में लटका है एनएच104 पथ व बेलवा डैम निर्माण का कार्य: जिले में बेलवा डैम निर्माण का कार्य आज भी अधर में लटका है. संबंधित निर्माण एजेंसी कार्य छोड़कर फरार हो गयी. उसके बाद से लोग आज तक निर्माण के लिए किसी विकास पुरुष की बाट जोह रहे हैं. एनएच104 पथ का कार्य भी अधर में लटका है. इसके अतिरिक्त जिले में कई विकास योजनाएं आज भी अधूरी पड़ी है. जिसको पूरा कर शिवहर के रूप में निखार लाया जा सकता है. फिलहाल जिले का कमान नव पदस्थापित डीएम अवनीश कुमार सिंह,डीडीसी मो.वारिस खान व एसपी संतोष कुमार के हाथ में हैं. लोग आशान्वित है कि इनके सहयोग से जिले का कायाकल्प होगा.

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