भागलपुर, संजीव झा: जिले के पीरपैंती प्रखंड में अब स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है. यहां मल-अपशिष्ट उपचार संयंत्र (एफएसटीपी) स्थापित किया जायेगा. इस संयंत्र की क्षमता प्रतिदिन कई किलोलीटर अपशिष्ट जल के शोधन की होगी. परियोजना पर लगभग एक करोड़ 58 लाख रुपये की लागत आयेगी, जिसे बुडको द्वारा तैयार किया जायेगा. इसके लिए न सिर्फ मंजूरी मिली है, बल्कि एजेंसी की बहाली को लेकर भी निविदा जारी कर दी गयी है.
समस्या का होगा स्थायी समाधान
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से स्वच्छता को लेकर चुनौतियां सामने आ रही थी. पीरपैंती और आसपास के क्षेत्रों में अपशिष्ट जल का निस्तारण न होने से गंदगी और प्रदूषण की समस्या बनी रहती थी. नये संयंत्र के लगने से इस समस्या का स्थायी समाधान होगा. अपशिष्ट जल को वैज्ञानिक तरीके से शुद्ध कर पुन उपयोग योग्य बनाया जायेगा, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बनी रहेगी और बीमारियों के फैलाव पर भी काफी हद तक अंकुश लगेगा.
18 अक्तूबर को खुलेगा निविदा की तकनीकी बिड
पीरपैंती में मल-अपशिष्ट उपचार संयंत्र लगाने का काम एजेंसी के माध्यम से होगा. इस काम के लिए एजेंसी की तलाश शुरू हो गयी है. बुडको मुख्यालय ने निविदा जारी की है, ताकि इसमें भाग लेने वालों में किसी एक का चयन कर उन्हें बनाने की जिम्मेदारी सौंपी जाये. बुडको की ओर से जारी निविदा के तहत तकनीकी बिड 18 अक्तूबर को खोली जायेगी. इसके बाद फाइनेंसियल बिड खोलकर एजेंसी चयन किया जायेगा.
चयनित एजेंसी को छह महीने में लगाना होगा प्लांट
एजेंसियों के लिए निविदा का कागजात डाउनलोड करने की अवधि 03 अक्तूबर से 17 अक्तूबर निर्धारित की गयी है. निविदा भरने की अंतिम तिथि 17 अक्तूबर रखी गयी है. यह काम जिस किसी एजेंसी को मिलेगी, उन्हें 06 महीने में प्लांट स्थापित करना होगा.
बिहार की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें
क्या है फीकल स्लग ट्रीटमेंट प्लांट?
फीकल स्लग ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) ऐसा संयंत्र है, जो सेप्टिक टैंकों और गड्ढों से निकाले गये मल-अपशिष्ट (फिकल स्लग) का सुरक्षित रूप से उपचार करता है. इन संयंत्रों में अपशिष्ट को इस तरह प्रोसेस किया जाता है कि उसे सुरक्षित रूप से निस्तारित किया जा सके या पुनः उपयोग में लाया जा सके. जैसे बागवानी के लिए जैविक खाद तैयार करना और पानी को साफ कर दोबारा इस्तेमाल करना. यह विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी है जहां केंद्रीय सीवेज सिस्टम उपलब्ध नहीं होता है. एफएसटीपी का मुख्य उद्देश्य मल-अपशिष्ट के सही प्रबंधन और निपटान के जरिये प्रदूषण को रोकना है.
इसे भी पढ़ें: Bihar Elections 2025: BJP और JDU में सीटों को लेकर बन गई बात, पार्टी के बड़े नेता ने दी जानकारी
