बिक्रमगंज नगर के वार्ड संख्या 27 स्थित सिकरिया गांव की जीवनरेखा माना जाने वाला काव नदी पर बना बांस का चचरी पुल शुक्रवार को नदी का जलस्तर बढ़ते ही तेज धारा में बह गया. पुल टूटते ही गांव के लगभग 90 प्रतिशत लोगों का मुख्य आवागमन पूरी तरह ठप हो गया. सबसे अधिक परेशानी किसानों, स्कूली बच्चों, मजदूरों और रोजमर्रा के काम से शहर आने-जाने वाले लोगों को हो रही है.
ग्रामीणों ने बताया कि यही चचरी पुल सिकरिया को सीधे बिक्रमगंज बाजार से जोड़ता था. इस रास्ते से किसान साइकिल पर सब्जियां लेकर महज आधा किलोमीटर की दूरी तय कर बाजार पहुंच जाते थे. अब पुल टूट जाने के कारण उन्हें थाना चौक होकर करीब चार किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा. इससे समय, श्रम और परिवहन लागत तीनों बढ़ गई है.
ग्रामीण मंटू कुशवाहा ने बताया कि स्थायी पुल निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है.ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही स्थायी पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो वे फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे. गांव में जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी खुलकर सामने आ रही है.
विधायक की वादाखिलाफी से नाराज हैं लोग
विधानसभा चुनाव के दौरान इसी मुद्दे पर गांव के लोगों ने वोट बहिष्कार का निर्णय लिया था. उस समय महागठबंधन प्रत्याशी रहे और वर्तमान विधायक अरुण सिंह स्वयं गांव पहुंचे थे. ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने अपने हाथों से वोट बहिष्कार का बैनर हटाते हुए भरोसा दिलाया था कि चुनाव जीतने के बाद स्थायी पुल का निर्माण कराया जाएगा. उनके आश्वासन के बाद ही ग्रामीणों ने मतदान में हिस्सा लिया था.
अब ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव समाप्त हुए काफी समय बीत गया, लेकिन स्थायी पुल निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई. अब बरसात में चचरी पुल भी बह जाने से पूरा गांव फिर उसी पुराने संकट में फंस गया है. लोगों का कहना है कि हर वर्ष बरसात में यही स्थिति बनती है, लेकिन जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की ओर से स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता.
इस संबंध में विधायक अरुण सिंह ने बताया कि कार्य की अनुशंसा पूरी हो चुकी है. राशि के अभाव में कार्य की शुरुआत नहीं हो सकी है.
