रोहतास में रहस्यों की गुफा गुप्ता धाम, जहां भस्मासुर से बचने को भोलेनाथ ने लिया था आश्रय, सावन में उमड़ रहे श्रद्धालु

Gupta Dham Shravani Mela : श्रावणी मेला विशेष: जानिए कैमूर की पहाड़ियों में स्थित गुप्ता धाम का रहस्य, जहां भगवान शिव ने भस्मासुर से बचने के लिए गुप्त रूप से आश्रय लिया था।

Gupta Dham Shravani Mela : रोहतास जिले के चेनारी प्रखंड अंतर्गत कैमूर पर्वतमाला के घने जंगलों में स्थित गुप्ता धाम इन दिनों शिवभक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. श्रावण मास शुरू होते ही पूरा क्षेत्र "बोल बम", "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से गूंज उठा है. कठिन चढ़ाई और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बावजूद हजारों श्रद्धालु बाबा गुप्तेश्वरनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए यहां पहुंच रहे हैं.

भस्मासुर की लोकमान्यता से जुड़ा है गुप्ता धाम का इतिहास

स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, भगवान शिव ने कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भस्मासुर को ऐसा वरदान दिया था कि वह जिसके सिर पर हाथ रखेगा, वह भस्म हो जाएगा. मान्यता है कि वरदान मिलने के बाद भस्मासुर ने भगवान शिव को ही आजमाने का प्रयास किया. तब भगवान शिव कैमूर की इन दुर्गम पहाड़ियों में स्थित गुफा में आकर गुप्त हो गए. इसी लोकमान्यता के आधार पर इस स्थान का नाम गुप्ता धाम पड़ा. बाद में भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर भस्मासुर का अंत किया. यह कथा स्थानीय लोकश्रुतियों पर आधारित है और श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था के साथ प्रचलित है.

पांडवों की आराधना से भी जुड़ी है एक मान्यता

एक अन्य स्थानीय मान्यता के अनुसार, महाभारत काल में वनवास के दौरान पांडवों ने भी इस गुफा में भगवान शिव की आराधना की थी. गुफा के भीतर स्थापित स्वयंभू शिवलिंग पर वर्षभर प्राकृतिक रूप से जल की बूंदें गिरती रहती हैं. श्रद्धालु इसे भगवान शिव का निरंतर जलाभिषेक मानते हैं. गुफा का शीतल वातावरण और प्राकृतिक चट्टानें श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति कराती हैं.

सावन में कई राज्यों से पहुंचते हैं कांवड़िये

श्रावण मास के दौरान बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और आसपास के अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में कांवड़िये बाबा गुप्तेश्वरनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. कई श्रद्धालु बक्सर से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हुए चेनारी के रास्ते गुप्ता धाम पहुंचते हैं. कठिन यात्रा के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखती.

धार्मिक स्थल के साथ पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र

गुप्ता धाम केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख स्थल है. चारों ओर फैले घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां, प्राकृतिक झरने और शांत वातावरण इसे आध्यात्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाते हैं. बरसात के मौसम में यहां की हरियाली श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती है.

श्रावणी मेले के लिए प्रशासन ने किए व्यापक इंतजाम

श्रावणी मेले को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं. गुफा मार्ग की साफ-सफाई, बैरिकेडिंग, पेयजल, स्वास्थ्य शिविर, प्रकाश व्यवस्था, नियंत्रण कक्ष तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गुफा के भीतर वॉकिंग मैट बिछाए गए हैं. पुलिस, वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो.

आस्था, प्रकृति और लोकविश्वास का जीवंत संगम

गुप्ता धाम की पहचान केवल इसकी प्राचीन गुफा और स्वयंभू शिवलिंग तक सीमित नहीं है. यहां आने वाला हर श्रद्धालु आस्था, विश्वास और स्थानीय लोककथाओं का अनूठा अनुभव लेकर लौटता है. कैमूर की पहाड़ियों में बसा यह पावन धाम आज भी धार्मिक पर्यटन और शिवभक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. श्रावणी मेला सदियों पुरानी परंपरा, लोकविश्वास और प्रकृति के अद्भुत संगम का जीवंत उदाहरण है.

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By Prabhat khabar news desk

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