Rohtas Paddy Transplantation : बिहार के धान के कटोरे के रूप में पहचान रखने वाले रोहतास जिले में इस बार कमजोर मानसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. आषाढ़ का पहला पखवारा बीतने के बावजूद जिले में धान की रोपनी लगभग ठप है. कृषि विभाग की तीन जुलाई तक की रिपोर्ट के अनुसार रोहतास उन 24 जिलों में शामिल है, जहां अब तक एक प्रतिशत क्षेत्र में भी धान की रोपनी नहीं हो सकी है.
Rohtas News : सामान्य वर्षो की तुलना में काफी पीछे रोपनी
आमतौर पर आषाढ़ के पहले पखवारे तक जिले में करीब 40 प्रतिशत क्षेत्र में धान की रोपनी हो जाती है, लेकिन इस वर्ष बारिश नहीं होने से खेत सूने पड़े हैं. समय पर तैयार किया गया धान का बिचड़ा भी खेतों में रोपे जाने का इंतजार कर रहा है.
Sasaram News : बिचड़ा तैयार, लेकिन पानी के बिना रुकी खेती
शिवसागर, करगहर, चेनारी, नोखा, कोचस, दिनारा, तिलौथू, बिक्रमगंज, अकोढ़ीगोला, नासरीगंज, संझौली और सूर्यपुरा प्रखंडों के किसानों ने समय पर धान का बिचड़ा तैयार कर लिया है. हालांकि खेतों में पर्याप्त पानी नहीं होने से रोपनी शुरू नहीं हो पा रही है. जिन किसानों के पास निजी सिंचाई की सुविधा है, वे डीजल पंप के सहारे सीमित क्षेत्र में रोपनी कर रहे हैं.
किसानों की बढ़ी चिंता, लागत बढ़ने का डर
किसानों का कहना है कि पिछले साल इसी समय तक अधिकांश गांवों में धान की रोपनी तेजी से चल रही थी. इस बार खेत और बिचड़ा दोनों तैयार हैं, लेकिन बारिश नहीं होने से खेती प्रभावित हो रही है. लगातार देरी से खेती की लागत बढ़ने और उत्पादन घटने की आशंका भी बढ़ गई है.
Rohtas Weather : राज्यभर में भी खराब है स्थिति
कृषि विभाग के अनुसार पूरे बिहार में अब तक केवल चार प्रतिशत धान की रोपनी हो सकी है, जबकि सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के पहले और दूसरे सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की पैदावार पर इसका असर पड़ सकता है.
मानसून पर टिकी किसानों की उम्मीद
रोहतास के किसान अब अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. उनका कहना है कि समय पर मानसून सक्रिय होने पर ही धान की रोपनी रफ्तार पकड़ सकेगी और खरीफ सीजन की खेती को नुकसान से बचाया जा सकेगा.
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