रोहतास का करगहर प्रखंड पूरी तरह रामभरोसे: दफ्तरों से बड़े अधिकारी गायब, प्रभार के खेल में पिस रही जनता

Rohtas News: रोहतास जिले के करगहर प्रखंड में सरकारी व्यवस्था पूरी तरह प्रभार के सहारे चल रही है. कृषि, शिक्षा, पंचायती राज, आपूर्ति और श्रम विभाग समेत दर्जनों महत्वपूर्ण पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं. विकास कार्य ठप, जनता परेशान. पढ़ें रजनीकांत पांडेय की ग्राउंड रिपोर्ट.

Rohtas News (रजनीकांत): रोहतास जिले के अंतर्गत आने वाले बेहद महत्वपूर्ण और बड़े करगहर प्रखंड से सरकारी व्यवस्था के पूरी तरह पटरी से उतर जाने की एक बेहद चिंताजनक और सनसनीखेज ग्राउंड रिपोर्ट सामने आई है. बीस बड़ी पंचायतों को अपने आगोश में समेटने वाले इस विशाल करगहर प्रखंड में इन दिनों पूरी प्रशासनिक और सरकारी व्यवस्था केवल ‘अतिरिक्त प्रभार’ के बैसाखी सहारे रेंग रही है. प्रखंड के एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनों अति-महत्वपूर्ण विभागों के मुख्य पद पिछले कई वर्षों से लगातार रिक्त (खाली) पड़े हैं. नतीजा यह है कि पूरे क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार की विकास योजनाओं की रफ्तार पूरी तरह ठप हो चुकी है और आम ग्रामीण जनता को अपने छोटे-छोटे कागजी कार्यों के लिए रोजाना ब्लॉक के चक्कर काटकर बुरी तरह भटकना पड़ रहा है.

जिले का सबसे बड़ा ‘कृषि हब’ बिना साहब के लावारिस, समन्वयकों के भरोसे भटक रहे हैं गरीब किसान

स्थानीय प्रगतिशील किसानों और ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, करगहर प्रखंड को पूरे रोहतास जिले का मुख्य ‘कृषि हब’ (अनाज का कटोरा) माना जाता है. इसके बावजूद इस कृषि प्रधान क्षेत्र में प्रखंड कृषि पदाधिकारी (BAO) का मुख्य पद लंबे समय से खाली पड़ा है. नियमित अधिकारी नहीं रहने के कारण पूरा कृषि कार्यालय केवल कृषि समन्वयकों और किसान सलाहकारों के भरोसे जैसे-तैसे घिसट रहा है. किसानों को खेती से जुड़ी नई तकनीकों का मार्गदर्शन, सरकारी खाद-बीज की सब्सिडी और अन्य योजनाओं का सही लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है, जिससे खरीफ फसल की तैयारियों पर बुरा असर पड़ रहा है.

200 स्कूलों की मॉनिटरिंग भगवान भरोसे, राशन कार्ड और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र पर लगा ग्रहण

करगहर प्रखंड के भीतर करीब 200 सरकारी प्राथमिक और मध्य विद्यालय संचालित होते हैं. लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि यहां कोई स्थायी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) तैनात ही नहीं है. विभाग की पूरी जिम्मेदारी दूसरे प्रखंड के अधिकारी को प्रभार में दे दी गई है, जिससे स्कूलों की शैक्षणिक गतिविधियों की लाइव निगरानी और प्रशासनिक जांच पूरी तरह हवा-हवाई हो चुकी है. यही हाल राशन व्यवस्था का भी है, जहां प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (MBI) का पद एक वर्ष से खाली है. पड़ोसी ब्लॉक के अफसर को अतिरिक्त प्रभार मिलने के कारण डीलर की मनमानी और नए राशन कार्ड के आवेदनों के निष्पादन में महीनों की देरी हो रही है.

इसके साथ ही जेएसएस (JSS) का पद भी वर्षों से रिक्त पड़ा है, जिसके कारण नवजात बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र और मृतकों के मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे अत्यंत आवश्यक दस्तावेज बनवाने के लिए परिजनों को भारी मानसिक टॉर्चर झेलना पड़ रहा है.

हजारों मजदूरों का श्रमिक पंजीकरण अटका, चकबंदी और उद्यान कार्यालयों में लग रहे हैं ताले

पंचायती राज विभाग में बीपीआरओ (BPRO) का पद खाली होने से पंचायतों के विकास फंड्स का काम अटका हुआ है. वहीं श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (LEO) के न होने से हजारों गरीब जॉब कार्डधारी मजदूरों का नया श्रमिक पंजीकरण नहीं हो सका है, जिससे वे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और दैनिक भत्तों से पूरी तरह वंचित हैं. उद्यान पदाधिकारी और चकबंदी पदाधिकारी का पद खाली रहने से बागवानी और भूमि सुधार के मामलों में भारी अराजकता फैली है. चकबंदी दफ्तर आने वाले दर्जनों किसान रोजाना समाधान न होने पर निराश होकर अपने घर लौट जाते हैं.

स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों के बीच इस बात की भी भारी चर्चा और सस्पेंस है कि आखिर क्यों रोहतास के इस वीआईपी प्रखंड में कोई भी बड़ा अधिकारी अपनी पदस्थापना (पोस्टिंग) कराने से लगातार बचता भाग रहा है. वर्तमान जमीनी हकीकत यह है कि केवल बीडीओ, सीओ, सीडीपीओ, पीओ मनरेगा और बीसीओ को छोड़ दिया जाए, तो ब्लॉक का लगभग हर दूसरा मुख्य विभाग या तो पूरी तरह खाली है या प्रभार के खेल में उलझा हुआ है. ऐसे में करगहर की जनता सीधे बिहार सरकार से यह तीखा सवाल पूछ रही है कि आखिर उन्हें पूर्णकालिक और ईमानदार अधिकारियों के लिए और कितने वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा. इस बड़ी प्रशासनिक पोल के खुलने के बाद अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पर क्या कड़ा ऐक्शन लेता है.

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Published by: Aditya Kumar Ravi

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