Sasaram News : प्राथमिक शिक्षक शिक्षा कॉलेज (पीटीईसी), सासाराम में डीएलएड सत्र 2025-27 के प्रशिक्षुओं के लिए कार्य एवं शिक्षा के अंतर्गत ‘कबाड़ से जुगाड़’ विषय पर रचनात्मक कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसमें प्रशिक्षुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और बेकार बोतल, कागज, कार्डबोर्ड, डिब्बे सहित अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों से आकर्षक एवं उपयोगी शैक्षिक और सजावटी सामग्री तैयार की.
बेकार वस्तुओं को उपयोगी सामग्री में बदलने का दिया संदेश
प्रशिक्षुओं ने अपनी कल्पनाशीलता के माध्यम से ‘अपशिष्ट से उपयोगी वस्तु’ की अवधारणा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया. उन्होंने अनुपयोगी समझी जाने वाली वस्तुओं का रचनात्मक इस्तेमाल कर उन्हें उपयोगी और आकर्षक सामग्री में बदलकर दिखाया. तैयार सामग्री को कॉलेज परिसर में प्रदर्शित भी किया गया.
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प्रदर्शनी देखने के लिए प्रशिक्षुओं में रहा उत्साह
प्रदर्शनी को देखने के लिए अन्य प्रशिक्षुओं और शिक्षकों में भी उत्साह रहा. प्रशिक्षुओं द्वारा तैयार की गयी सामग्री का अवलोकन कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य नीरज कुमार मौर्य, वरिष्ठ व्याख्याता आनंद कुमार सिंह, व्याख्याता डॉ. आशीष कुमार चौबे, डॉ. नीना कुमारी सहित अन्य अतिथियों ने किया. उत्कृष्ट और सराहनीय कार्य करने वाले प्रशिक्षुओं के प्रयासों की प्रशंसा भी की गयी.
सृजनात्मक सोच और पर्यावरण जागरूकता विकसित करना उद्देश्य
कॉलेज के अधिकारियों ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य अनुपयोगी और कबाड़ सामग्री के पुन: उपयोग के साथ प्रशिक्षुओं में सृजनात्मक सोच, नवाचार और पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करना है. इस गतिविधि के माध्यम से प्रशिक्षुओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति के साथ प्राथमिक कक्षाओं के लिए कम लागत वाली शिक्षण सामग्री तैयार करने का व्यावहारिक अनुभव मिला.
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सहयोग और समस्या-समाधान का कौशल भी होगा विकसित
उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां प्रशिक्षुओं में रचनात्मकता, सहयोग, समस्या-समाधान, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और कार्य-कौशल विकसित करने में सहायक होती हैं. प्रशिक्षुओं ने भी अपनी तैयार सामग्री के माध्यम से यह संदेश दिया कि अनुपयोगी मानी जाने वाली वस्तुओं का रचनात्मक उपयोग कर उन्हें उपयोगी और आकर्षक सामग्री में बदला जा सकता है.
प्रतिभागियों को भविष्य में सक्रिय भागीदारी के लिए किया प्रोत्साहित
कार्यक्रम के अंत में प्रभारी प्राचार्य और व्याख्याताओं ने सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की. साथ ही उन्हें भविष्य में भी इस तरह की रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया.
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