Rohtas News : राजकीय डिग्री महाविद्यालय, शिवसागर में प्रेमचंद जयंती के अवसर पर 'प्रेमचंद का साहित्य और उनके विचार' विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. प्राचार्य प्रो. डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने कथा सम्राट प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक सरोकारों और उनकी वैचारिक विरासत पर अपने विचार साझा किए.
प्रेमचंद की रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक
हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अरुण कुमार पांडेय ने प्रेमचंद के साहित्य की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि उनकी रचनाएं हर आयु वर्ग के पाठकों को नई दृष्टि और नई अनुभूति प्रदान करती हैं. उन्होंने कहा कि समय के साथ प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ती गई है.
छात्र जीवन की यादों से जोड़ा प्रेमचंद का साहित्य
अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. धीरेंद्र कुमार रॉय ने छात्र जीवन में पढ़ी गई प्रेमचंद की रचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रेमचंद हिंदी साहित्य के ऐसे नक्षत्र हैं, जिनकी चमक समय के साथ और अधिक बढ़ती जा रही है. कॉलेज के प्रधान सहायक कौशल किशोर सिंह ने भी प्रेमचंद की रचनाओं से जुड़ी अपनी स्मृतियां साझा कीं.
छात्रों ने पूछे सवाल, शिक्षकों ने दिए जवाब
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने प्रेमचंद के साहित्य से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका शिक्षकों ने विस्तार से उत्तर दिया. संगोष्ठी में हिंदी विभाग की रुक्मिना कुमारी, अंशु कुमारी, प्रीति कुमारी, स्मृति कुमारी, विवेक राज तथा समाजशास्त्र विभाग की नंदिनी कुमारी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं.
