रोहतास : घर की पोषण वाटिका से दूर होगा कुपोषण, बिसेनिया बाल गांव में महिलाओं और बच्चों की हुई हीमोग्लोबिन जांच

Sasaram News : घर की छोटी जमीन पर उगाई गईं हरी सब्जियां बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं. इसी सोच के साथ बिसेनिया बाल गांव में कुपोषण उन्मूलन और पोषण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें महिलाओं और बच्चों के हीमोग्लोबिन की जांच की गई.

Sasaram News : घर की छोटी-सी जमीन पर उगाई गयी हरी सब्जियां बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य की बड़ी जरूरत पूरी कर सकती हैं. इसी सोच को ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, बिक्रमगंज की ओर से शुक्रवार को जमोढ़ी पंचायत के बिसेनिया बाल गांव में कुपोषण उन्मूलन एवं पोषण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया.

अनुसूचित जाति उप-परियोजना के तहत आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं और स्कूली बच्चों के हीमोग्लोबिन की जांच की गयी. जांच के दौरान अधिकांश बच्चों और महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर अपेक्षाकृत कम पाया गया. स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें संतुलित एवं आयरनयुक्त आहार लेने की सलाह दी. कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों को पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी.

पोषण वाटिका से बढ़ेगी भोजन में पोषक तत्वों की उपलब्धता

केंद्र के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. आर.के. जलज ने कहा कि कुपोषण केवल स्वास्थ्य की समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध परिवार की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा से है. ग्रामीण परिवार अपने घर के आसपास उपलब्ध स्थान में पोषण वाटिका विकसित कर बच्चों और महिलाओं के भोजन में आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ा सकते हैं.

उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र ऐसे परिवारों को सब्जी उत्पादन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा.

हरी पत्तेदार सब्जियों को भोजन में शामिल करने की सलाह

मृदा वैज्ञानिक डॉ. रामाकांत सिंह ने संतुलित भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियों, दालों और स्थानीय पोषक खाद्य पदार्थों को शामिल करने की आवश्यकता बतायी. वहीं, उद्यान वैज्ञानिक डॉ. रतन कुमार ने ग्रामीणों को पोषण वाटिका लगाने की वैज्ञानिक विधि की जानकारी दी.

उन्होंने पालक, मेथी, सहजन, चौलाई सहित आयरनयुक्त एवं हरी पत्तेदार सब्जियों के उत्पादन, बीज चयन और पौध प्रबंधन के बारे में जानकारी दी.

35 बच्चों और 21 महिलाओं की हुई जांच

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विद्यालय के बच्चों एवं गांव की महिलाओं का हीमोग्लोबिन परीक्षण किया. उपलब्ध जांच में औसत हीमोग्लोबिन स्तर करीब 10 ग्राम प्रति डेसीलीटर के आसपास रहा. स्वास्थ्यकर्मियों ने कम हीमोग्लोबिन वाले प्रतिभागियों को आयरनयुक्त भोजन लेने और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य केंद्र से चिकित्सकीय सलाह लेने की जानकारी दी.

कार्यक्रम में उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बिसेनिया बाल के करीब 35 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया. वहीं, गांव की करीब 21 महिलाएं भी शामिल हुईं. विद्यार्थियों और महिलाओं को संतुलित आहार, स्वच्छता, हरी सब्जियों के महत्व और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया.

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स्वास्थ्यकर्मियों और शिक्षकों का रहा सहयोग

स्वास्थ्य टीम में डॉ. के.के. रेड्डी, फार्मासिस्ट संतराज सिंह, एएनएम अन्नपूर्णा कुमारी और सीएचओ नेमत आजमा सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहे. कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षक सत्य नारायण सिंह, अन्य शिक्षकों और आंगनबाड़ी सहायिका इंदु देवी का महत्वपूर्ण सहयोग रहा.

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने कहा कि पोषण सुधार के लिए जागरूकता के साथ परिवारों को उत्पादन से पोषण तक की अवधारणा से जोड़ना जरूरी है. बिसेनिया बाल गांव में इस दिशा में गतिविधियां आगे भी जारी रहेंगी.

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कृषि स्नातक छात्राओं ने भी समझी पोषण की उपयोगिता

कार्यक्रम में केके यूनिवर्सिटी, नालंदा की कृषि स्नातक की 19 छात्राएं भी शामिल हुईं. ये छात्राएं कृषि विज्ञान केंद्र में आरएडब्ल्यूई कार्यक्रम के तहत पिछले एक माह से खेती-किसानी की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त कर रही हैं.

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने ग्रामीण पोषण, सब्जी उत्पादन और स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों को नजदीक से समझा.

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By संतोष चंद्रकांत

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