Rohtas News : प्रज्ञा प्रवाह चिति बिक्रमगंज जिला इकाई के बैनर तले प्रखंड के घुसिया खुर्द गांव में अगस्त माह की मासिक व्याख्यानमाला के तहत ‘भारत विभाजन की पीड़ा’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गयी. कार्यक्रम नवीन चंद्र साह के आवास पर हुआ. अध्यक्षता नवीन चंद्र साह ने की. गोष्ठी में वक्ताओं ने वर्ष 1947 में हुए भारत विभाजन की त्रासदी, विस्थापन और सामाजिक पीड़ा को याद करते हुए राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया.
वैदिक मंत्रोच्चारण और दीप प्रज्ज्वलन से शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ. मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त शिक्षक नवनीत कुमार गुप्ता, मुख्य वक्ता सामाजिक कार्यकर्ता संजय तिवारी, अध्यक्ष सह डॉ. नगेंद्र झा महिला महाविद्यालय, बिक्रमगंज के प्राचार्य डॉ. अमरेंद्र कुमार मिश्र सहित अन्य अतिथियों का सम्मान किया गया. विषय की प्रस्तावना डॉ. अमरेंद्र कुमार मिश्र ने रखी, जबकि मंच संचालन डॉ. रविंद्र कुमार सिंह ने किया.
‘विभाजन आज भी इतिहास का दर्दनाक अध्याय’
नवीन चंद्र साह ने भारत विभाजन को भारतीय इतिहास की दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक घटना बताया. मुख्य अतिथि नवनीत कुमार गुप्ता ने कहा कि विभाजन के दौरान हुए विस्थापन और अपनों से बिछड़ने का दर्द आज भी लोगों की स्मृतियों में जीवित है. उन्होंने कहा कि इतिहास की इस त्रासदी को समझना आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है.
हर भारतीय की जिम्मेदारी है देश की एकता
मुख्य वक्ता संजय तिवारी ने कहा कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखना किसी एक वर्ग या विचारधारा की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक भारतीय का दायित्व है. उन्होंने सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया.
‘पीड़ा याद करने का उद्देश्य भविष्य को सुरक्षित करना’
जिला संयोजक डॉ. दिलीप कुमार ने कहा कि विभाजन की पीड़ा को याद करना अतीत को दोहराना नहीं है. इसका उद्देश्य इतिहास से सीख लेकर भविष्य में ऐसी त्रासदी की पुनरावृत्ति रोकना और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संकल्प लेना है. कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ.
