1300 विद्यार्थियों व 30 शिक्षकों के लिए मात्र एक शौचालय
SASARAM NEWS.शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के बड़े-बड़े दावे हो रहे हैं. हो भी क्यों नहीं? प्रखंड के कई स्कूल मिडिल से उच्च, तो कुछ उच्च से प्लस टू में अपग्रेड हो चुके हैं. स्कूल अपग्रेड हुए. वहां बच्चों व शिक्षकों की संख्या बढ़ गयी, पर अधिकांश स्कूलों में बच्चों व शिक्षकों की संख्या के अनुपात में सुविधाएं नहीं बढ़ी.
कोचस के गंगा पासवान अनुसूचित जाति प्लस टू विद्यालय में बदहाली
वर्ष 2023-24 में तीन लाख रुपये की लागत से बनने वाले तीन यूनिट शौचालयों को अधूरा छोड़ फरार हो गया संवेदक
तीन साल पहले स्कूल को मिडिल से हाइस्कूल में किया गया था अपग्रेड, पर सुविधाएं नहीं बढ़ी
कोचस.
शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के बड़े-बड़े दावे हो रहे हैं. हो भी क्यों नहीं? प्रखंड के कई स्कूल मिडिल से उच्च, तो कुछ उच्च से प्लस टू में अपग्रेड हो चुके हैं. स्कूल अपग्रेड हुए. वहां बच्चों व शिक्षकों की संख्या बढ़ गयी, पर अधिकांश स्कूलों में बच्चों व शिक्षकों की संख्या के अनुपात में सुविधाएं नहीं बढ़ी. कहीं कमरे के अभाव में बच्चे बरामदे में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, तो कहीं शौचालय के अभाव में छात्र-छात्राओं, शिक्षक-शिक्षिकाओं को फजीहतों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसा ही एक स्कूल है- गंगा पासवान अनुसूचित जाति प्लस टू विद्यालय कोचस. जहां स्कूल अपग्रेड होने के तीन साल बाद भी बच्चों व शिक्षकों के अनुपात में शौचालय का निर्माण नहीं हो पाया है. स्कूल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में लगभग तीन लाख रुपये की लागत से तीन यूनिट शौचालय बनाने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत राशि का आवंटन हुआ था. पर आधा-अधूरा शौचालय का निर्माण कार्य छोड़ कर संवेदक फरार हो गया. इसके बाद दो साल बीत गये, पर शौचालय का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है. रखरखाव के अभाव में अर्द्धनिर्मित शौचालय दिन प्रतिदिन क्षतिग्रस्त हो रहा है.मिडिल स्कूल के समय के शौचालय से चल रहा काम
स्कूल के अपग्रेड होने से पहले मिडिल स्कूल के बच्चों के अनुपात में बने मात्र एक शौचालय का उपयोग 1300 छात्र-छात्राएं और 30 शिक्षक-शिक्षिकाएं कर रही हैं. इससे छात्रों व शिक्षकों की परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है. इस संबंध में स्कूल की प्रधानाध्यापिका विमला कुमारी ने कहा कि शौचालय निर्माण के लिए कई बार वरीय अधिकारियों को मांग पत्र दिया है. पर, अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. जिला कार्यालय में बताया जाता है कि शौचालय निर्माण कराने वाली एजेंसी ही भाग गयी है. वर्तमान में कम से कम 10 यूनिट शौचालय के निर्माण की जरूरत है. हमारे स्कूल में वर्तमान में कुल 1300 बच्चे नामांकित हैं. इसके अलावे 30 शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं. परेशानी होना लाजमी है. छात्राओं व महिला शिक्षकों को ज्यादा परेशानी है.बीइओ को अब पता चला शौचालय की है कमी
स्कूल में शौचालय की कमी है. इसके संबंध में जब प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अरविंद कुमार से पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि मामला संज्ञान में अब आया है. हम अपने स्तर से भी प्रयास कर रहे हैं कि स्कूल में शौचालय का निर्माण हो जाए. बीइओ की बातों से स्पष्ट है कि इसके पहले वे शौचालय को लेकर कितना सजग थे. खैर, अभी भी समय है. विभागीय अधिकारी सजग हो कार्य करें, तो 1300 छात्रों व 30 शिक्षकों का शौचालय जल्द मिल सकता है.
क्या कहते हैं विद्यार्थी
1.स्कूल में शौचालय की सुविधा पर्याप्त नहीं होने से हम छात्राओं को काफी फजीहत झेलनी पड़ती है. हम कुछ कर भी तो नहीं सकते.-खुशी कुमारी,छात्रा
2. बरसात के दिनों में बहुत परेशानी होती है. बाहर जा नहीं सकते और कैंपस में शौचालय है नहीं. स्कूल में शौचालय जल्द बनना चाहिए.
-अभिषेक कुमार
3.स्कूल में शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित कराना स्कूल प्रबंधन का कार्य है. हमें घर जाना पड़ता है. हमारा पठन-पाठन भी प्रभावित होता है.-प्रिंस कुमार
4.हम लड़कियों को कभी-कभी लड़कों का शौचालय इस्तेमाल करना पड़ता है. हमें शर्मिंदगी महसूस होती है. अधूरे शौचालय का निर्माण जल्द जरूरी है.-लक्ष्मीना कुमारी
5. एक ही शौचालय होने से स्वच्छता रखना मुश्किल होता है. ऐसे में अस्वच्छ वातावरण में शौचालय का उपयोग करने से बीमारी का खतरा बढ़ जाता है.
-नंदनी कुमारी
6.स्वच्छता संबंधी बीमारियों के कारण कई लड़कियां स्कूल नहीं आ पाती है. पढ़ाई बाधित होती है. यह महत्वपूर्ण कार्य प्रबंधन को जल्द कराना चाहिए.-कंचन कुमारी
7. स्कूल परिसर में शौचालय की कमी है. हमें मजबूरी में खुले में जाना पड़ता है. हमारे स्कूल की स्वच्छता भी प्रभावित होती है.-राजा कुमार
8. संवेदक भाग गया या किसी अन्य कारण से कार्य अधूरा है. तो, यह प्रबंधन व विभाग की जिम्मेदारी है कि अधूरे कार्य को पूरा कराये.-संजीत कुमार
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