Rohtas News : रोहतास के चर्चित कथाकार नर्मदेश्वर की साहित्यिक यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गयी है. उनकी चर्चित कहानी ‘कंघी’ को बिहार के विश्वविद्यालयों के एमए हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है. अब विभिन्न विश्वविद्यालयों में एमए हिंदी के विद्यार्थी इस कहानी को अपने पाठ्यक्रम के तहत पढ़ेंगे. वहीं उनकी कहानी ‘बीज’ को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी NCERT की ‘पढ़े और बढ़े’ श्रृंखला के तहत तैयार ‘अन्न का साहित्य’ पठन सामग्री में भी स्थान मिला है.
प्रेमचंद और रेणु जैसे दिग्गज कथाकारों के साथ शामिल हुई ‘कंघी’
एमए हिंदी के हिंदी कहानी पत्र में नर्मदेश्वर की कहानी ‘कंघी’ के साथ प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, फणीश्वरनाथ रेणु, निर्मल वर्मा और राजेंद्र यादव जैसे प्रतिष्ठित कथाकारों की रचनाएं भी शामिल की गयी हैं. विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में नर्मदेश्वर की कहानी को जगह मिलना जिले के साहित्य जगत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
‘बीज’ को NCERT की पठन सामग्री में मिली जगह
नर्मदेश्वर की दूसरी चर्चित कहानी ‘बीज’ को NCERT की ‘पढ़े और बढ़े’ श्रृंखला के तहत तैयार ‘अन्न का साहित्य’ पठन सामग्री में शामिल किया गया है. इस तरह उनकी रचनाएं उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम के साथ स्कूली स्तर की पठन सामग्री तक भी पहुंच रही हैं.
साहित्यकारों ने दी बधाई
नर्मदेश्वर की इस उपलब्धि पर वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय सिंह, एसपी जैन कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रौशन समेत जिले के कई साहित्यकारों ने उन्हें बधाई दी है. साहित्यकारों ने कहा कि विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम और NCERT की पठन सामग्री में जिले के लेखक की रचनाओं को जगह मिलना पूरे जिले के लिए गौरव की बात है.
आधा दर्जन से अधिक कथा संग्रह प्रकाशित
सिकरियां निवासी कथाकार नर्मदेश्वर के अब तक आधा दर्जन से अधिक कथा संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. इसके अलावा उनका कविता संग्रह ‘आग की नदी’ भी प्रकाशित हो चुका है. साहित्य की विभिन्न विधाओं में सक्रिय नर्मदेश्वर ने ‘एक एकड़ घास’ नाम से अंग्रेजी कविताओं का हिंदी में अनुवाद भी किया है.
भोजपुरी में भी हुआ अंग्रेजी कविताओं का अनुवाद
नर्मदेश्वर की अंग्रेजी कविताओं का भोजपुरी में भी अनुवाद प्रकाशित हो चुका है. साहित्यकारों के अनुसार, उनकी रचनाओं को शैक्षणिक पाठ्यक्रम और पठन सामग्री में स्थान मिलना उनकी साहित्यिक यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इससे उनकी रचनाएं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों तक पहुंचेंगी और रोहतास की साहित्यिक पहचान को भी व्यापक स्तर पर मजबूती मिलेगी.
