10.65 करोड़ रुपये से 50 टन प्रतिदिन कचरा के लिए बनेगा मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर
100 टन प्रतिदिन निकलनेवाले गीले कचरे के प्रबंधन के लिए 4.88 करोड़ रुपये खर्च कर बनेगा कंपोस्ट प्लांट
पांच एकड़ जमीन में तैयार होगा एमआरएफ और साइंटिफिक लैनफिल साइट
सासाराम नगर.
नगर निगम का कचरा अब इधर-उधर नहीं फेंका जायेगा. इसे चेनारी प्रखंड के सरैया में रखा जायेगा.दरअसल सरैया में मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) और साइंटिफिक लैनफिल साइट का निर्माण किया जायेगा. 31 मई को हुए बोर्ड की बैठक में इसका निर्णय लेकर निर्माण की स्वीकृति प्रदान कर दी गयी थी. निर्णय के बाद इसे धरातल पर उतारने का प्रयास शुरू हो गया है. इसी के तहत सरैया में 15.73 करोड़ रुपये की लागत एमआरएफ और कंपोस्ट प्रबंधन केंद्र की तकनीकी स्वीकृति भी मुख्य अभियंता ने प्रदान कर दी है. अब इसके लिए टेंडर निकालने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी. एमआरफ सेंटर का निर्माण 10.65 करोड़ रुपये खर्च कर किया जायेगा. वहीं 100 टन प्रतिदिन गीला कचरा प्रबंधन के लिए 4.88 करोड़ रुपये से कंपोस्ट प्लांट बनाया जायेगा. कचरा डंपिंग प्वाइंट नगर निगम क्षेत्र से करीब 19 किलोमीटर की दूरी पर होगा. इस सेंटर पर कॉम्पैक्टर से निगम का कचरा पहुंचाया जायेगा. जहां पर सूखे कचरे से अलग-अलग मटेरियल की छंटाई की जायेगी, जो रिसाइकल करने के योग्य होंगे. उन्हें रिसाइकिल किया जायेगा और जो इस योग्य नहीं होंगे उन्हें मशीन के माध्यम से तोड़ दिया जायेगा. वहीं गीले कचरे से खाद बनाया जायेगा.नगर निगम क्षेत्र से प्रतिदिन 150 टन निकलता है कचरा
नगर निगम से प्रतिदिन फिलहाल 150 टन कचरा निकल रहा है, जिसका प्रबंधन नहीं होता है. यह कचरा खाली जगहों पर ले जाकर डंप किया जा रहा है. कुछ दिन तक यह कचरा वार्ड संख्या-44 में डंप किया जा रहा था, जिसको लेकर वहां के लोगों ने विरोध जताया, तो अब यह कचरा बेदा नहर के किनारे डंप किया जा रहा है. वहीं लाखों रुपये के लागत से मरम्मत कराये गये डिलियां पीट में खाद नहीं बनाया जा रहा है. वह भी बंद पड़ा है.कचरे से निगम को आमदनी भी होगीइस संबंध में स्वच्छता पदाधिकारी कुमार अनुगम ने बताया कि कचरा प्रबंधन केंद्र नहीं होने से निगम क्षेत्र से निकलनेवाले कचरे डंप हो रहे हैं. सरैया में एमआरएफ सेंटर बनने के बाद निगम से निकलनेवाले कचरे से निगम को आमदनी भी होगी. सूखे कचरे की छंटाई के बाद इसे रिसाइकल करनेवाली कंपनियों को बेच दिया जाता है. वहीं गीले कचरे से खाद बनाया जाता है.
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