चेनारी बाजार में सावन की बहार, हरी चूड़ियों-श्रृंगार सामान की बढ़ी मांग

सावन के महीने में चेनारी बाजार में हरियाली छाई है। सुहागिन महिलाओं में हरी चूड़ियों, लहठी और श्रृंगार सामग्री की जमकर खरीदारी हो रही है। जानें इसका महत्व।

Sawan : सावन माह की शुरुआत होते ही रोहतास जिले के चेनारी प्रखंड का बाजार हरियाली के रंग में पूरी तरह रंग गया है. खासकर सुहागिन महिलाओं में हरे रंग के श्रृंगार को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. चेनारी बाजार की चूड़ी, श्रृंगार और कपड़ा दुकानों पर सुबह से लेकर देर शाम तक खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है. हर तरफ हरे रंग की चूड़ियां, लहठी, बिंदी और कपड़ों की चमक दिखाई दे रही है, जिससे पूरा बाजार सावन के रंग में सराबोर नजर आ रहा है.

दुकानों पर उमड़ रही महिलाओं की भीड़

सावन के इस पावन महीने में महिलाएं अपने श्रृंगार को खास बनाने के लिए बाजार का रुख कर रही हैं. चेनारी के स्थानीय बाजार में इन दिनों काफी चहल-पहल है. दुकानदारों ने भी इस सीजन को ध्यान में रखते हुए नए-नए डिजाइन की चूड़ियां और लहठी का भरपूर स्टॉक मंगाया है. सुबह दुकान खुलते ही ग्राहक पहुंचने लगते हैं और देर शाम तक खरीदारी जारी रहती है.

चूड़ी विक्रेता मनोज कुमार, रामदयाल पाल और श्याम जायसवाल बताते हैं कि सावन में हरी और लाल चूड़ियों की मांग सबसे ज्यादा रहती है. इस बार फिरोजाबाद, मुजफ्फरपुर और देवघर से खास कांच की हरी चूड़ियां मंगाई गई हैं. वहीं जयपुर से डिजाइनर लहठी भी लाई गई है, जिसे महिलाएं काफी पसंद कर रही हैं. स्टोन और मिक्स डिजाइन वाली चूड़ियां इस बार ट्रेंड में हैं.

कीमत भी हर वर्ग के अनुसार

बाजार में चूड़ियों की कीमत 30 रुपये से लेकर 200 रुपये तक है, जिससे हर वर्ग की महिलाएं अपनी पसंद के अनुसार खरीदारी कर रही हैं. वहीं लहठी की कीमत 250 रुपये से 650 रुपये तक बताई जा रही है. सस्ती से लेकर आकर्षक डिजाइन वाली महंगी चूड़ियां भी बाजार में उपलब्ध हैं.

श्रृंगार सामग्री के कारोबारी आदित्य कुमार, राकेश कुमार और गोल्डन गुप्ता बताते हैं कि हरी बिंदी और नेल पेंट की बिक्री भी तेजी से बढ़ी है. दिल्ली, बनारस और पटना सिटी से मंगाए गए सामान की खूब डिमांड है. आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग चेनारी बाजार पहुंच रहे हैं.

सावन में हरे रंग का धार्मिक महत्व

पंडित अरविंद कुमार उपाध्याय के अनुसार सावन माह में हरे रंग का विशेष धार्मिक महत्व होता है. हरा रंग बुध ग्रह का प्रतीक माना जाता है, जो बुद्धि, समृद्धि और सुख-शांति का संकेत देता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव को हरियाली बेहद प्रिय है. इसी वजह से सुहागिन महिलाएं सावन में हरी चूड़ियां और हरे वस्त्र धारण कर अपने परिवार की खुशहाली और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं.

परंपरा के साथ सेहत से भी जुड़ी मान्यता

आयुर्वेद और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार हरी चूड़ियों की खनक मन को शांति देती है और मानसिक तनाव को कम करने में मददगार मानी जाती है. साथ ही यह सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है. यही कारण है कि सावन में हरी चूड़ियां केवल सजने-संवरने का साधन नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का प्रतीक बन जाती हैं.

चेनारी बाजार में हर दिन बढ़ती भीड़ और दुकानों की रौनक यह साफ संकेत दे रही है कि सावन का रंग अब पूरे शबाब पर है. आने वाले दिनों में यह रौनक और भी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.


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By Prabhat khabar news desk

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