Sasaram News : बिक्रमगंज नगर में प्रवेश करते ही नगर पर्षद की ओर से शुल्क वसूली का सिलसिला शुरू हो जाता है. वाहन हो या मंडी की दुकान, पार्किंग हो या सैरात, हर जगह शुल्क की दर निर्धारित है और इसकी वसूली के लिए नगर परिषद ने सूचना पट भी लगा दिए हैं. लेकिन सवाल यह है कि जिस नगर परिषद को टैक्स और शुल्क लेने की इतनी चिंता है, क्या उसी अनुपात में आम लोगों को सुविधाएं भी मिल रही हैं.
हकीकत यह है कि सब्जी मंडी कचरे से पटी है, शहर की सड़कें जाम से जूझ रही हैं, पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं है और पैदल चलने के लिए व्यवस्थित फुटपाथ तक उपलब्ध नहीं है. ऐसे में नगरवासी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उनसे लिए जा रहे इन शुल्कों के बदले नगर परिषद उन्हें क्या सुविधा दे रही है. नगर पालिका अधिनियम, 2007 की धारा 127 एवं 129 के प्रावधानों के तहत सैरातों की बंदोबस्ती को लेकर नगर के चारों प्रमुख मार्गों पर नगर की सीमा के पास सूचना पट लगाए गए हैं. इन पर विभिन्न सैरातों और उनके लिए निर्धारित शुल्क की जानकारी दी गयी है.
गाड़ियों पर लगने वाला टैक्स इस प्रकार है
नगर परिषद के सूचना पट के अनुसार टेंपो से 15 रुपये प्रतिदिन, जीप एवं टैक्सी से 20 रुपये प्रतिदिन तथा ईंट, गिट्टी एवं बालू लदे वाहनों से 100 रुपये प्रतिदिन शुल्क निर्धारित है. बस के लिए 50 रुपये प्रतिदिन, जबकि मिनी बस एवं सिटी राइड के लिए 40 रुपये प्रतिदिन शुल्क वसूला जाता है. यहीं नहीं नगर में पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं होने के बावजूद बाइक के लिए 12 घंटे का पांच रुपये और चार पहिया वाहन के लिए 20 रुपये शुल्क निर्धारित है.
सब्जी मंडी में झाड़ू भी नहीं लगता फिर भी प्रतिदिन टैक्स देना अनिवार्य
बिक्रमगंज नगर के सब्जी मंडी में छोटे दुकानदार से 20 रुपये, बड़े दुकानदार से 40 रुपये प्रतिदिन तथा फल मंडी की दुकान से 20 रुपये प्रतिदिन शुल्क लेने का प्रावधान है. मांस की दुकान से 30 रुपये तथा मछली और मुर्गा दुकान से 20-20 रुपये प्रतिदिन शुल्क निर्धारित किया गया है.
लेकिन शुल्क के बदले सुविधा की तस्वीर इसके उलट है. सब्जी मंडी में कचरे का अंबार लगा रहता है और नियमित सफाई को लेकर दुकानदारों में नाराजगी है.
बिना किसी सुविधा नगर का दर्जा हासिल
नगरवासियों का कहना है कि शहर की प्रमुख सड़कों पर रिक्शा, ठेला और ऑटो के खड़े रहने से जाम की स्थिति बनी रहती है. डेहरी रोड में बस पड़ाव निर्धारित होने के बावजूद पटना, रांची सहित दूर-दराज जाने वाली बसें और सासाराम जाने वाली लोकल बसें सड़क पर ही खड़ी कर यात्रियों को बैठाती हैं.शहर में न पर्याप्त पार्किंग है, न पार्क, न जिम और न ही पैदल चलने के लिए व्यवस्थित फुटपाथ.
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि नगर परिषद जिस शुल्क की वसूली कर रही है, उसके बदले नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं कब मिलेंगी. वसूली के लिए सूचना पट पर दरें साफ लिखी हैं, लेकिन सुविधाओं की सूची में नगरवासियों को आखिर क्या मिला, इसका जवाब नगर परिषद के अधिकारियों से मांगा जा रहा है. इस संबंध में ईओ कोमल कुमारी ने बताया कि व्यवस्थाओं में बदलाव की लगातार कोशिश जारी है.
