Bihar University Education Bill Protes : सासाराम स्थित शांति प्रसाद जैन महाविद्यालय के शिक्षकों ने प्रस्तावित बिहार विश्वविद्यालय शिक्षा विधेयक का विरोध शुरू कर दिया है. महाविद्यालय के शिक्षकों ने लिखित रूप से अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि प्रस्तावित विधेयक से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होगी और उच्च शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
Rohtas News : कैडर विभाजन के प्रस्ताव पर जताई आपत्ति
शिक्षकों ने बिहार सरकार द्वारा विश्वविद्यालय शिक्षक और कॉलेज शिक्षक के रूप में कैडर विभाजन के प्रस्ताव की आलोचना की है. शिक्षकों का कहना है कि इससे शिक्षकों की नियुक्ति, पदोन्नति, प्रशासनिक निर्णय और नीतिगत मामलों में विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता कम हो जाएगी.
Sasaram News : उच्च शिक्षा विभाग के नियंत्रण को लेकर उठाए सवाल
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालयों के कामकाज पर उच्च शिक्षा विभाग का सीधा नियंत्रण बढ़ जाएगा. इससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्त कार्यप्रणाली प्रभावित होने की आशंका है.
शिक्षकों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी जताई चिंता
विरोध कर रहे शिक्षकों ने विधेयक के उन प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई है, जिनमें शिक्षकों की राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध लगाने की बात कही जा रही है. उन्होंने कहा कि विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता उच्च शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
स्नातक कॉलेज शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर भी विरोध
शिक्षकों ने कहा कि स्नातक कॉलेजों के शिक्षकों को विश्वविद्यालय स्तर पर प्रोफेसर पद पर पदोन्नति से वंचित करने जैसे प्रावधान भी चिंताजनक हैं. इससे शिक्षकों के करियर विकास पर असर पड़ेगा.
कुलपति और कुलाधिपति से हस्तक्षेप की मांग
शिक्षकों ने कुलपति और कुलाधिपति से मामले में हस्तक्षेप करते हुए विश्वविद्यालयों की गरिमा और स्वायत्तता बनाए रखने की मांग की है. उन्होंने कहा कि विवादित प्रावधानों को लागू नहीं किया जाना चाहिए.
विधेयक वापसी तक जारी रहेगा विरोध.
शिक्षकों ने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और अधिकारों की रक्षा के लिए शिक्षक संघ और महासंघ एकजुट होकर आंदोलन जारी रखेंगे. उन्होंने सरकार से प्रस्तावित विधेयक वापस लेने की मांग की.
