सासाराम, बिक्रमगंज व दावथ में नशीले इंजेक्शन की बड़ी खेप बरामद, तीन गिरफ्तार

कार्रवाई. एसपी के निर्देश पर चला विशेष अभियान, मेडिकल दुकानों की आड़ में नशे का कारोबार, 13 सौ वायल इंजेक्शन जब्त, संगठित नेटवर्क का खुलासा, भारी मात्रा में सिरिंज भी बरामद, जांच में जुटी पुलिस

बिक्रमगंज. जिले के सासाराम, बिक्रमगंज और दावथ क्षेत्र से पुलिस ने नशीले इंजेक्शन की बड़ी खेप बरामद करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के पास से पेटियों में भरे करीब 13 सौ वायल बुप्रेनोरफिन, डाईक्लोफेनक और फेनिरामिन मेलिएट इंजेक्शन के साथ भारी मात्रा में डिस्पोजेबल सिरिंज बरामद की गयी है. गुरुवार को बिक्रमगंज एसडीपीओ कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में एएसपी संकेत कुमार ने बताया कि एसपी रोशन कुमार के निर्देश पर बुधवार को नशीले इंजेक्शन के अवैध कारोबार के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया था. इसी क्रम में सासाराम नगर थाना क्षेत्र के पोस्ट ऑफिस गली स्थित पशु दवा विक्रेता लक्की मेडिकल हॉल के संचालक 32 वर्षीय सत्यम आनंद, पिता सुदामा प्रसाद, को उसके बढ़ईया बाग स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया. इसके अलावा बिक्रमगंज रेलवे स्टेशन के पास गुमटी में दवा का अवैध कारोबार कर रहे बिक्रमगंज थाना क्षेत्र के धारूपुर गांव निवासी 45 वर्षीय रजनीश कुमार, पिता कामेश्वर सिंह, तथा दिनारा थाना क्षेत्र के मलियाबाग स्थित सरपंच मेडिकल हॉल के संचालक 26 वर्षीय रजनीश कुमार, पिता संतोष कुमार सिंह, निवासी दावथ थाना क्षेत्र, को भी गिरफ्तार किया गया है. एएसपी ने बताया कि तीनों आरोपियों के ठिकानों से करीब 13 सौ वायल नशीले इंजेक्शन और बड़ी संख्या में सिरिंज बरामद की गयी है. छापेमारी के दौरान मिली सामग्री से यह स्पष्ट होता है कि नशीले इंजेक्शन की तस्करी का यह एक संगठित अवैध नेटवर्क है. तीनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए लगातार होगी कार्रवाई उन्होंने कहा कि इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए लगातार कार्रवाई की जायेगी. एएसपी ने आम लोगों से अपील की कि वे स्वयं और अपने बच्चों को नशे की जद से बचाएं. नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़ी किसी भी सूचना को तुरंत पुलिस तक पहुंचाएं. अभिभावक अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और नशे के शुरुआती लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लें. प्रभात इनडेप्थ बुप्रेनोरफिन, डाइक्लोफेनक और फेनिरामिन मेलिएट तक जानिए कितना खतरनाक है नशे का यह कॉकटेल बुप्रेनोरफिन, डाइक्लोफेनक और फेनिरामिन मेलिएट इंजेक्शन जब नशे के उद्देश्य से एक साथ ली जाती हैं, तो यह संयोजन सीधे तौर पर जानलेवा साबित हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार बुप्रेनोरफिन एक ओपिऑइड दवा है, जो तेज नशा देती है और लंबे समय में इसकी लत लग जाती है. इसका सबसे खतरनाक प्रभाव सांस की गति पर पड़ता है. अधिक मात्रा या बार-बार सेवन से सांस रुकने, बेहोशी और मौत तक का खतरा रहता है. डाइक्लोफेनक आमतौर पर दर्द और सूजन के इलाज में इस्तेमाल की जाती है, लेकिन इसका अनियंत्रित उपयोग पेट, किडनी और लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि नशे के लिए इसे अन्य दवाओं के साथ लेने पर शरीर पर इसका दुष्प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है. आंतरिक रक्तस्राव, किडनी फेल होने और हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा बना रहता है. वहीं फेनिरामिन मेलिएट एक एंटी-एलर्जिक दवा है, जो नींद और सुस्ती पैदा करती है. नशे के कॉकटेल में इसे इसलिए मिलाया जाता है ताकि बुप्रेनोरफिन के प्रभाव को बढ़ाया जा सके. डॉक्टरों का कहना है कि इससे व्यक्ति अत्यधिक सुस्ती, मानसिक भ्रम और हृदय गति में असामान्यता का शिकार हो सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इन तीनों इंजेक्शनों का संयुक्त सेवन सबसे ज्यादा खतरनाक है. इससे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र दब जाता है, सांस लेने की प्रक्रिया बाधित होती है और अचानक मौत की आशंका कई गुना बढ़ जाती है. ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में युवाओं के बीच इसका चलन चिंता का विषय बन चुका है. प्रशासनिक स्तर पर भले ही समय-समय पर नशीले इंजेक्शनों की खेप पकड़ी जा रही हो, लेकिन जानकारों का मानना है कि केवल कार्रवाई पर्याप्त नहीं है. दवाओं की सप्लाइ चेन पर सख्त निगरानी, मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच और नशा मुक्ति को लेकर जन-जागरूकता अभियान जरूरी है.

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Published by: Panchdev kumar

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