लोक सेवा आश्रम हरिहर क्षेत्र सोनपुर में पूज्य संत बाबा रामलखन दास जी महाराज की 57वीं पुण्य स्मृति के अवसर पर शुक्रवार को भव्य शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय संगीत समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और संगीत साधना के वातावरण में हुआ.
मंच पूजन और आशीर्वचन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मंच पूजन तथा संत विष्णु दास उदासीन मौनी बाबा के आशीर्वचन के साथ हुआ. अपने संदेश में संत विष्णु दास उदासीन ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत ईश्वर की उपासना का श्रेष्ठ माध्यम है. उन्होंने बाबा रामलखन दास के तप, सेवा और आध्यात्मिक जीवन को स्मरण करते हुए लोगों से उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया.
राग यमन, भैरव और भूपाली की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
संगीत समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने राग यमन, भैरव, भूपाली एवं भैरवी पर आधारित शास्त्रीय प्रस्तुतियां दीं. कलाकारों ने द्रुत ख्याल, तराना, ठुमरी और भजनों की मनोहारी प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया. कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से शास्त्रीय संगीत की गरिमा को जीवंत कर दिया. तबला और हारमोनियम की मधुर संगत ने पूरे आश्रम परिसर को सुरमय बना दिया. संगीत प्रेमियों ने प्रत्येक प्रस्तुति का तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया.
संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में संत-महात्माओं, संगीत प्रेमियों, स्थानीय गणमान्य नागरिकों एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही. समारोह के दौरान कलाकारों को सम्मानित भी किया गया. आयोजकों ने कहा कि बाबा रामलखन दास जी की स्मृति में आयोजित यह संगीत समारोह भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा के संरक्षण के साथ-साथ आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का भी सशक्त माध्यम है.
आयोजन में इनकी रही भूमिका
उद्घोषक के रूप में डॉ. अशोक कुमार सिंह गौतम, मंच सहयोगी डॉ. चन्द्र किशोर पराशर एवं मंच व्यवस्था सहयोगी के रूप में अजय सिंह ने अपनी भूमिका निभाई.
