Saran News : गिनी की पटरियों पर दौड़ने के लिए मढ़ौरा कारखाने से रेल इंजन रवाना

Saran News : राज्य के मढ़ौरा में मौजूद रेल इंजन कारखाना ने नयी इबारत लिख दी है. यहां तैयार हो रहा इंजन अफ्रीकी देश गिनी की पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार है.

छपरा. राज्य के मढ़ौरा में मौजूद रेल इंजन कारखाना ने नयी इबारत लिख दी है. यहां तैयार हो रहा इंजन अफ्रीकी देश गिनी की पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार है. चार इंजन की पहली खेप वहां के लिए रवाना हो गयी है. मेक इन इंडिया की अवधारणा को सार्थक बनाते हुए निर्यात किए जाने वाले इन इंजनों का नाम ‘कोमो’ रखा गया है. गिनी देश का एक प्रतिनिधि मंडल इस वर्ष मई-जून में यहां आया हुआ था. इस दौरान 140 लोकोमोटिव इंजन के निर्यात का तीन हजार करोड़ रुपये एकरारनामा इस कंपनी के साथ हुआ था. इसके तहत दो महीने बाद ही पहली खेप रवाना हो रही है. जल्द ही ‘कोमो’ की अन्य खेपें रवाना की जायेगी. गिनी देश के लिए निर्यात होने वाले इन रेल इंजनों की क्षमता 4500 हार्स पॉवर है.

निर्यात होने वाले इंजन का रंग रखा गया नीला

आने वाले समय में 6 हजार हार्स पॉवर तक की क्षमता वाले रेल इंजन का निर्माण करने की योजना है। भारत में सप्लाई होने वाले रेल इंजन का रंग लाल और पीला होता है. वहीं, गिनी निर्यात होने वाले रेल इंजन का रंग नीला रखा गया है. सभी इंजन का कैब पूरी तरह से एयरकंडीशन है. विदेश भेजे जाने वाले इन इंजनों में इवेंट रिकॉर्डर, लोको कंट्रोल, खास तरह का ब्रेक सिस्टम एएआर समेत अन्य कई खास तरह के उपकरण लगाये गये हैं, जिनकी उपयोगिता अलग-अलग तरह से है.

700 इंजन का हो चुका निर्माण

मढ़ौरा रेल इंजन कारखाना से 2018 से अब तक 700 इंजन का निर्माण हो चुका है. औसतन 100 रेल इंजनों का निर्माण प्रतिवर्ष किया जाता है. इसके अलावा पिछले नौ वर्षों में यहां 250 से अधिक रेल इंजन का मेंटेनेंस किया जा चुका है, जो गांधीधाम (गुजरात) स्थित रेल इंजन कारखाना से कहीं अधिक है. यहां पिछले 4 वर्षों में 500 रेल इंजनों को मेंटेन किया गया है.

बिहार को मिलती है 900 करोड़ की जीएसटी

इस रेल इंजन कारखाने से प्रति वर्ष बिहार को 900 करोड़ रुपये की जीएसटी प्राप्त होती है. इतनी ही जीएसटी केंद्र सरकार के खाते में भी जाती है। ऊर्जा का सालाना बिल सिर्फ 50 करोड़ रुपये से अधिक की आदायती यह कंपनी करती है. इस कंपनी के खुलने से आसपास के इलाके में आर्थिक गतिविधि कई तरह से बढ़ी है. 3 होटल, 7 रेस्टुरेंट, 6 स्कूल, 3 बैंक, 6 एटीएम समेत अन्य सुविधाएं यहां विकसित हुई हैं. वाराणसी रेल इंजन कारखाना से पिछले 50 वर्षों में 15 से 20 इंजन का निर्यात किया गया है. जबकि, मढ़ौरा के इस कंपनी से अकेले गिनी को 140इंजन निर्यात किए जा रहे हैं.

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Published by: Alok kumar

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