Saran News: (छपरा से संजय भारद्वाज की रिपोर्ट)
सारण, सोनपुर और दरियापुर प्रखंड के हरदिया चंवर क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण और प्लाटिंग को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की कोलकाता बेंच ने बड़ी कार्रवाई की है. बिहार रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है. साथ ही रेरा सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है. इस कार्रवाई के बाद प्रस्तावित सोनपुर सैटेलाइट शहर और ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला हरदिया चंवर की संरक्षित आर्द्र भूमि में अवैध निर्माण और जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ा है. एनजीटी ने वेटरन्स फोरम की याचिका पर सुनवाई करते हुए रेरा बिहार को अपने पूर्व आदेश का पालन नहीं करने पर फटकार लगाई. ट्रिब्यूनल ने रेरा को 21 बिल्डरों की सूची वादी को उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है.
वेटरन्स फोरम ने दायर की थी याचिका
वेटरन्स फोरम के सचिव डॉ. बीएनपी सिंह ने एनजीटी में याचिका दायर कर हरदिया चंवर क्षेत्र में नियमों के उल्लंघन का मामला उठाया था. उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र आर्द्र भूमि संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित है और यहां किसी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित है. वैज्ञानिक संस्था इसरो के सैटेलाइट चित्रों के आधार पर इस क्षेत्र की पहचान आर्द्र भूमि के रूप में की गई है.
‘धरती की किडनी’ मानी जाती है आर्द्र भूमि
विशेषज्ञों के अनुसार आर्द्र भूमि भूजल स्तर को बनाए रखने और मिट्टी की गुणवत्ता बचाने में अहम भूमिका निभाती है. इन क्षेत्रों में जल पक्षियों, वनस्पतियों और कई जीवों का प्राकृतिक आवास होता है. वैज्ञानिक इन आर्द्र भूमियों को “धरती की किडनी” भी कहते हैं.
हरदिया चंवर में धड़ल्ले से हो रही प्लाटिंग
याचिकाकर्ता के अनुसार हरदिया और आसपास की संरक्षित आर्द्र भूमि में बड़े पैमाने पर अवैध प्लाटिंग और निर्माण कार्य चल रहा है. भारत सरकार ने इस क्षेत्र में आठ आर्द्र भूमि क्षेत्रों को चिन्हित किया है. बावजूद इसके बिल्डर लगातार जमीन की खरीद-बिक्री कर रहे हैं.
ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना पर भी उठे सवाल
हरदिया चंवर क्षेत्र में बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना भी अब विवादों में आ गई है. डॉ. बीएनपी सिंह का कहना है कि एयरपोर्ट निर्माण के लिए आर्द्र भूमि में 5 से 6 फीट तक मिट्टी भराई की जाएगी, जिससे गंगा के बाढ़ जल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होगा. इससे आसपास के 20 से 25 गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है.
जमीन अधिग्रहण को लेकर बढ़ी बेचैनी
ग्रेटर पटना विस्तार योजना और एयरपोर्ट निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर किसान भी आंदोलित हैं. ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना लागू होने से विस्थापन और जलजमाव जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होंगी.
7 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को तय की है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ट्रिब्यूनल आगे क्या रुख अपनाता है और प्रस्तावित परियोजनाओं पर इसका क्या असर पड़ता है.
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