Saran News: (छपरा से प्रभात किरण हिमांशु की रिपोर्ट)
गर्मी की छुट्टियों के दौरान अधिकांश लोग परिवार और बच्चों के साथ पर्यटन स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं. बिहार और देश के अन्य राज्यों के ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक स्थलों को देखने के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं. हालांकि सारण जिला भी धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध है, जहां देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं. इसके बावजूद स्थानीय लोगों में अपने जिले की धरोहरों को जानने और देखने के प्रति अपेक्षित जागरूकता नहीं दिखती है. ऐसे में अभिभावक छुट्टियों के दौरान बच्चों को जिले के प्रमुख स्थलों का भ्रमण कराकर उन्हें अपनी विरासत से परिचित करा सकते हैं.
चिरांद में मिलते हैं प्राचीन सभ्यता के प्रमाण
सारण की पहचान विश्व पटल पर स्थापित करने वाले चिरांद को पुरातात्विक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. गंगा और सरयू के संगम तट पर स्थित इस स्थल से नवपाषाणकालीन अवशेष, मृदभांड और प्राचीन सभ्यता के अनेक प्रमाण मिले हैं. यहां आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का अभाव है, लेकिन इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वालों के लिए यह आकर्षण का प्रमुख केंद्र है. डोरीगंज के समीप स्थित दानी मौर्यध्वज के किले के अवशेष भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं.
पौराणिक मंदिरों की समृद्ध विरासत संजोए है सारण
सारण जिले में कई ऐसे मंदिर हैं जो धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व भी रखते हैं. सोनपुर स्थित हरिहरनाथ मंदिर विश्वप्रसिद्ध है. मान्यता है कि यहां स्थापित शिव और विष्णु की संयुक्त प्रतिमा अद्वितीय है. मंदिर परिसर में शुंग, पाल और गुप्तकालीन मूर्तियां भी मौजूद हैं. वहीं छपरा शहर के सरयू तट पर स्थित दधीचि आश्रम और उमानाथ मंदिर का उल्लेख पौराणिक कथाओं में मिलता है. मान्यता के अनुसार महर्षि दधीचि की अस्थियों से बने वज्र से देवताओं ने असुरों पर विजय प्राप्त की थी.
लोकनायक और लोककवि की जन्मभूमि भी है आकर्षण
सारण केवल धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक सीमित नहीं है. सिताबदियारा स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय संग्रहालय स्वतंत्रता आंदोलन और संपूर्ण क्रांति की विरासत को संजोए हुए है. यहां जेपी के जीवन से जुड़ी अनेक स्मृतियां संरक्षित हैं. वहीं भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले लोककवि भिखारी ठाकुर की जन्मस्थली कुतुबपुर दियारा भी पर्यटकों और साहित्य प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है.
द्वारिकाधीश मंदिर बन रहा नया पर्यटन केंद्र
छपरा के नैनी में करोड़ों रुपये की लागत से गुजरात के द्वारिकाधाम की तर्ज पर निर्मित द्वारिकाधीश मंदिर तेजी से प्रसिद्धि हासिल कर रहा है. लगभग 40 फीट ऊंचे इस भव्य मंदिर में आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया गया है. प्रतिदिन बिहार समेत अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. वहीं छपरा के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित डच मकबरा भी ऐतिहासिक महत्व रखता है. संरक्षण के अभाव में यहां पर्यटकों की संख्या कम है, लेकिन उचित देखरेख होने पर यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन सकता है.
गौतम स्थान और अंबिका भवानी मंदिर भी हैं प्रमुख आकर्षण
छपरा मुख्यालय से करीब छह किलोमीटर दूर रिविलगंज स्थित गौतम स्थान का संबंध रामायण काल से माना जाता है. मान्यता है कि यहीं भगवान श्रीराम ने महर्षि गौतम की पत्नी अहल्या का उद्धार किया था. यह स्थल संकटमोचन हनुमान के ममहर के रूप में भी प्रसिद्ध है. वहीं मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित आमी का अंबिका भवानी मंदिर पूरे बिहार में आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है. यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल
हरिहरनाथ मंदिर (सोनपुर), चिरांद घाट, दानी मौर्यध्वज किला, अंबिका भवानी मंदिर (आमी), दधीचि आश्रम (छपरा), गौतम स्थान (रिविलगंज), जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय संग्रहालय (सिताबदियारा), गढ़ देवी मंदिर (शिल्हौरी), भिखारी ठाकुर जन्मस्थली (कुतुबपुर दियारा), द्वारिकाधीश मंदिर (नैनी), वैष्णो देवी गुफा (अमनौर), अमृत पार्क (अमनौर) और एकसारी मंदिर (गोबरहिया) प्रमुख स्थलों में शामिल हैं. गर्मी की छुट्टियों में ये स्थल न केवल धार्मिक और ऐतिहासिक जानकारी प्रदान करते हैं, बल्कि बच्चों और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का भी अवसर देते हैं.
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