छपरा का सांढा मछली बाजार लोकल वेराइटी के लिए प्रसिद्ध, मेंटेनेंस के अभाव में खत्म हो रही रौनक

Saran News: छपरा के सांढा स्थित मछली बाजार में रोजाना पांच क्विंटल से अधिक मछलियों का कारोबार होता है. यहां मांगुर, फरहा, रेहु, अमेरिकन रेहु, देशी कतला, झींगा, सिंघी और पुयास समेत कई तरह की मछलियां उपलब्ध हैं. हालांकि, रखरखाव और उचित मेंटेनेंस के अभाव में यह बाजार आज बदहाली का शिकार हो गया है.

Saran News: (छपरा से प्रभात किरण हिमांशु की रिपोर्ट)

छपरा शहर का सांढा बाजार कभी अपनी बेहतरीन लोकल मछलियों की वेरायटी के लिए पूरे जिले में मशहूर था. सांढा ढाला के दोनों छोर पर लगने वाले इस बाजार में शहर के साथ-साथ दूरदराज के ग्रामीण इलाकों से भी लोग अपनी पसंदीदा मछलियां खरीदने पहुंचते हैं. शादी-विवाह का मौसम हो या कोई बड़ा आयोजन, मछली खरीदने के लिए लोगों की पहली पसंद यही बाजार रहा है. आज भी सांढा मछली बाजार ग्राहकों को उनकी पसंद की विभिन्न किस्मों की मछलियां उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बाजार के विकास और यहां के व्यवसायियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में अब तक ठोस पहल नहीं हो सकी है.

सड़क किनारे मछली बेचने को मजबूर हैं व्यवसायी

करीब पांच वर्ष पहले सांढा बाजार से सटे रेलवे ढाला पर ओवरब्रिज बनने के बाद ढाला का अस्तित्व खत्म हो गया, जिससे बाजार में आवाजाही कुछ कम हो गयी. इसके बावजूद आज भी यहां बड़ी संख्या में लोग मछली खरीदने पहुंचते हैं. हालांकि, मछली व्यवसायियों के लिए कोई स्थायी या चिन्हित स्थान नहीं होने के कारण उन्हें सड़क किनारे दुकान लगाकर कारोबार करना पड़ता है. प्रतिदिन लगभग 200 दुकानें सड़क किनारे सजती हैं, लेकिन इतने बड़े बाजार के बावजूद विकास के नाम पर यहां कुछ खास नजर नहीं आता.

छपरा के सांढा का मछली बाजार

जलनिकासी और साफ-सफाई की बदहाल व्यवस्था

मछली बाजार में जलनिकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से सालभर सड़क पर जलजमाव की स्थिति बनी रहती है. कचरा फेंकने के लिए कोई निर्धारित स्थान नहीं है और न ही डस्टबीन की व्यवस्था की गयी है, जिससे बाजार क्षेत्र में गंदगी का अंबार लगा रहता है. हल्की बारिश में भी सड़क पर कीचड़ फैल जाता है, जिससे खरीदारों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है.

आजादी से पहले से अस्तित्व में होने के बावजूद इस पुराने बाजार में बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है. यहां न शौचालय है, न यूरिनल और न ही पेयजल की समुचित व्यवस्था. वाहन पार्किंग की सुविधा नहीं होने के कारण अक्सर जाम की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है.

रोजाना पांच क्विंटल मछलियों का कारोबार

सांढा मछली बाजार में सुबह छह बजे से लेकर रात आठ बजे तक दुकानें सजती हैं. यहां मांगुर, फरहा, रेहु, अमेरिकन रेहु, देशी कतला, झींगा, सिंघी और पुयास समेत कई प्रकार की मछलियां उपलब्ध होती हैं. शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी रोजाना हजारों लोग यहां खरीदारी करने पहुंचते हैं. इस बाजार में प्रतिदिन करीब पांच क्विंटल मछलियों का कारोबार होता है.

सांढा बाजार में केंकड़ा और घोंघा की भी कई किस्में मिलती हैं, जिन्हें लोग काफी पसंद करते हैं। हालांकि, बरसात के मौसम में सड़क किनारे बैठकर कारोबार करना दुकानदारों के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है.

गंदगी के कारण महिलाएं आने से करती हैं परहेज

बाजार में साफ-सफाई और समुचित सुविधाओं के अभाव का असर महिलाओं की आवाजाही पर भी पड़ा है. गंदगी और जलजमाव की समस्या के कारण महिलाएं यहां आने में असहज महसूस करती हैं. कुछ वर्षों पहले तक गृहणियां बड़े उत्साह के साथ इस बाजार में आकर अपनी पसंद की मछलियां खरीदती थीं, लेकिन अब वैसा माहौल देखने को नहीं मिलता.

क्या कहती हैं डिप्टी मेयर

‘शहर के पुराने बाजारों के विकास की दिशा में काम किया जायेगा. सांढा मछली बाजार में साफ-सफाई और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं.’रागिनी देवी, डिप्टी मेयर, छपरा नगर निगम

Also Read: छपरा सदर अस्पताल परिसर में लग रहा भीषण जाम, अव्यवस्थित पार्किंग से हाल-बेहाल, मरीजों की बढ़ी मुश्किल

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Vikas Jha

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >